बुरहानपुर.
कहते हैं शिक्षा ग्रहण करने की कोई उम्र नहीं होती। मप्र मदरसा बोर्ड की हाई स्कूल व हायर सेकंडरी परीक्षा में ऐसे 12 लोग सम्मिलित हैं, जिनकी उम्र 44 से 62 वर्ष के बीच है।
उनका कहना है वे इस उम्र में पढ़ाई कर नई पीढ़ी को जीवनभर शिक्षा में लगे रहने की सीख देना चाहते हैं। कन्याशाला उमावि परीक्षा केंद्र में इनमें से ज्यादातर दीनी (धार्मिक) के साथ आधुनिक तालीम की भी परीक्षा दे रहे हैं।
मदरसा बोर्ड के इंचार्ज सैयद मोइनुद्दीन व अकरम जिया के मुताबिक हर साल कुछ बुजुर्ग परीक्षा देते हैं लेकिन इस बार संख्या अधिक हैं। मदरसा बोर्ड में उम्र का बंधन नहीं होने से सभी उम्र के लोग औपचारिक शिक्षा हासिल कर पा रहे हैं। इस साल कुल 163 परीक्षार्थी हाई स्कूल व हायर सेकंडरी की परीक्षा में बैठे।
आधुनिक तालीम देंगे
शिक्षा लेकर बच्चों को मदरसों में दीनी के साथ आधुनिक तालीम देना चाहते हैं ताकि लोगों को उनके हक दिला सकें।
-अजमतउल्ला अंसारी (62 वर्ष)
जीवनभर सीख सकते हैं
सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती है। उसके बाद भी कमियां रह जाती हैं। बेहतर शिक्षक मजबूत भविष्य बनाते हैं।
-मो. अकील फारूखी (44)
जन्म से कब्र तक चलती है पढ़ाई
हम बच्चों को यह बताना चाहते हैं कि वे पढ़ाई से जी न चुराएं। जन्म से कब्र में पहुंचने तक शिक्षा ली जा सकती है।
-अब्दुल लतीफ शाहिद (59 वर्ष)