इंदौर.
10 मई को हुई ऑल इंडिया इंस्टिटच्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) की पीजी एंट्रेंस एक्जाम के रिजल्ट 25 मई को घोषित हुए। हर 6 माह में होने वाली परीक्षा में इस बार इंदौर से पांच छात्रों का चयन हुआ है।
देशभर से करीब 20 हजार एमबीबीएस स्टूडेंट परीक्षा में बैठे थे। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से कुल पांच छात्र सफल रहे। इनमें ऑल इंडिया 104 रैंक लाने वाली डॉ. रीना मित्तल का स्कोर शहर के अन्य छात्रों से बेहतर रहा। मंगलवार को भास्कर कार्यालय में उन्होंने सफलता के बारे में बताया।
पहला प्रयास ही था- 124वीं रैंक हासिल करने वाले इंटर्नशिप के छात्र डॉ. आलोक उदिया का यह पहला प्रयास था। आलोक बताते हैं कि इसके लिए मैं 5-6 घंटे नियमित पढ़ाई करता था। हालांकि मेरी रैंक पीछे है और सीट 150 है। इसमें भी 50 सीट क्लिनिकल सब्जेक्ट के लिए है। इसलिए अभी पता नहीं ब्रांच मिल पाएगी या नहीं। एम्स में चयनित अन्य छात्र- डॉ. संदीप राठौर, डॉ. चैतन्य नामदेव और डॉ.ऋचा।
दादाजी की इच्छा से बनी डॉक्टर
बचपन में जब दादाजी बीमार रहा करते थे तो कहते थे, बेटा तुम बड़े होकर डॉक्टर बनना और मेरे जैसे लोगों को इलाज करना। तब से ही मैंने एमपीपीएमटी को टारगेट बनाया और 2002 में प्रदेश से टॉप २ में अपनी जगह बनाई।
रीना बताती हैं एम्स एक्जाम को टफ माना जाता है, लेकिन इसमें पूछे जाने वाले 21 सब्जेक्ट का कंसेप्ट और थ्योरी पर पकड़ बना ली जाए तो आसानी से एम्स में एडमिशन प्राप्त किया जा सकता है। एक्जाम में ३क्क् नम्बर के 200 प्रश्न ३ घंटे में हल करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।
माइनस मार्किग होने से कई छात्र आधे ही प्रश्न हल कर पाते हैं, ऐसे में गाइड का सहारा न लेते हुए सब्जेक्ट को समझकर एक्जाम देना ज्यादा उचित रहा। पापा हेमंत मित्तल और मां विमला कहती हैं रीना बचपन से टॉप करती आई है, एमपीपीएमटी के बाद एम्स उसका सपना था जो अब पूरा हुआ।