बीकानेर.
बीकानेर संभाग में हुए किसान आन्दोलन की लपटें पांच साल बाद भी नहीं बुझी हैं। हजारों किसान आज भी इन लपटों में सुलग रहे हैं। बीकानेर संभाग के किसानों ने पांच साल पूर्व पानी की मांग को लेकर जन आन्दोलन किया था जिसमें 11 लोगों की जानें भी गई थीं। आन्दोलन के दौरान श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ व बीकानेर जिलों में हजारों किसानों के खिलाफ पुलिस थानों में आगजनी, मारपीट, तोड़फोड़, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मुकदमे दर्ज हुए।
तत्कालीन भाजपा सरकार और किसान नेताओं के बीच अजमेर जेल में समझौता हुआ। सरकार ने सभी मुकदमे वापस लेने की घोषणा की थी। पांच साल बीत गए, राज्य में कांग्रेस की नई सरकार ने बागडोर संभाल ली। किसानों पर हुए मुकदमे आज भी यथावत हैं और वे तारीखें भुगत रहे हैं। तत्कालीन भाजपा सरकार के समय मुकदमे वापस लेने का निर्णय ठंडे बस्ते में रहा।
अब राज्य में कांग्रेस की सरकार आने पर किसान नेता एक बार फिर सक्रिय होने लगे हैं। अप्रैल माह में विधानसभा सत्र के दौरान माकपा विधायकों ने मुकदमे वापस लेने का मुद्दा उठाकर सरकार से आश्वासन भी लिया है। किसान आन्दोलन के दौरान प्रमुख नेता हेतराम बेनीवाल, अमरराराम, पवन दुग्गल, साहबराम बिश्नोई, संत लेखासिंह, लक्ष्मणसिंह, आत्माराम, लालचंद भादू सहित हजारों लोगों के खिलाफ श्रीगंगानगर में 64, हनुमानगढ़ में 17 और बीकानेर में सात मुकदमे दर्ज हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की छह-सात जून को जयपुर में बैठक है जहां किसानों को दिए जा रहे पानी और आन्दोलन में दर्ज हुए मुकदमों के संबंध में विचार-विमर्श कर आगामी रणनीति तय की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि इंदिरा गांधी नहर के प्रथम चरण में पानी के लिए किए गए किसान आन्दोलन के दौरान दर्ज हुए मुकदमों को गुण-दोष के आधार पर परीक्षण कर युक्तियुक्त समय पर वापस लेने का निर्णय लिया जाएगा।