भोपाल. प्रदेश के प्रायवेट मेडिकल तथा डेंटल कॉलेजों की प्रीपीजी तथा डीमेट की एनआरआई कोटे को छोड़कर शेष पचास प्रतिशत सीटें अब राज्य सरकार के हिस्से में होंगी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बैंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए वर्ष 2009 तथा 2010 के लिए यह व्यवस्था दी है।
उल्लेखनीय है कि प्रीपीजी तथा डीमेट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में प्रायवेट मेडिकल डेंटल कॉलेज एसोसिएशन तथा प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच विवाद चल रहा है। बुधवार को शासन ने स्थगन आदेश के स्थगित करने के मामले में जवाब पेश किया था।
वहीं निजी मेडिकल डेंटल कॉलेज एसोसिएशन ने डीमेट करवाने के लिए दावा पेश किया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति दीपक वर्मा तथा मरकडेय काटजू की बैंच ने डीमेट तथा प्रीपीजी की पचास प्रतिशत सीटें सरकार को देने का अंतरिम आदेश दिया है। मप्र शासन की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक व भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद तथा बीएस बांठिया ने पैरवी की।
आदेश का असर : प्रदेश में निजी मेडिकल तथा डेंटल कॉलेज की प्रीपीजी की कुल 87 सीट्स हैं। इनमें 53 एमडीएस की व 34 एमडी एमएस की हैं। जिसमें से 15 प्रतिशत एनआरआई कोटे की हटाकर करीब 37 सीटें प्रदेश सरकार के हिस्से में आ गई हैं। प्रदेश में चार निजी मेडिकल तथा तेरह निजी डेंटल कॉलेज हैं, जिनमें कुल 1138 सीटें एमबीबीएस की हैं। इनमें से अब 15 प्रतिशत एनआरआई कोटे को हटा दें तो करीब 485 सीटें राज्य सरकार को मिली हैं।
अब प्रीपीजी के छात्र असमंजस में : इस फैसले के बाद निजी मेडिकल तथा डेंटल कॉलेज एसोसिएशन द्वारा तीन दिन पहले ही भरी गई प्रीपीजी की सीट्स को लेकर असमंजसता बन गई है। पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश के तहत एसोसिएशन ने प्रीपीजी की लगभग नब्बे प्रतिशत सीटें भर दी हैं। अब आज दिए गए सुप्रीमकोर्ट के अंतरिम आदेश के तहत सरकार पचास प्रतिशत पर दावा करती है तो पूर्व में भर्ती किए मेडिकल छात्रों का क्या होगा? यह सवाल अनुत्तरित है।
आमने-सामने
ञ्चसुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शासन प्रीपीजी तथा डीमेट की पचास प्रतिशत सीटों पर छात्रों को प्रवेश देगा।
- विजया श्रीवास्तव प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा
ञ्चअब निजी मेडिकल डेंटल प्रीपीजी के छात्र सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। एसोसिएशन ने गुरुवार को बैठक आयोजित की है, जिसमें इस ताजा फैसले तथा डीमेट की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
- योगेश उपरीत कोषाध्यक्ष, प्रायवेट मेडिकल डेंटल कॉलेज एसोसिएशन