अजमेर. राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम के जोनल चीफ इंजीनियर का दफ्तर आखिर जयपुर से अजमेर में आ ही गया है। हैरत की बात यह है कि एक साल पहले इसकी घोषणा होने के बावजूद शहर में इसके लिए ना तो दफ्तर था, ना ही यहां अफसर रह रहे थे। अब तक अजमेर का नाम चल रहा था और काम जयपुर में हो रहा था।
भवन बनने से पहले विद्युत प्रसारण निगम के जोनल चीफ इंजीनियर का यह दफ्तर फिलहाल मदार में स्थित गेस्ट हाउस में स्थापित किया जा रहा है। जयपुर में कार्यरत दफ्तर का समस्त स्टाफ भी जल्दी ही अजमेर में शिफ्ट होगा। तत्कालीन भाजपा सरकार ने अप्रैल 08 में इस दफ्तर को अजमेर में स्थापित करने की घोषणा की थी। इससे पहले सन 2000 से प्रसारण निगम के जयपुर व जोधपुर में दो ही जोनल चीफ इंजीनियर दफ्तर थे।
अजमेर जोधपुर दफ्तर के अधीन आता था। इसमें पाली, सिरोही, उदयपुर व बीकानेर के सर्किल अफसर आते थे। जोधपुर का हमेशा विरोध होता रहा और दफ्तर को अजमेर में स्थापित करने की मांग लगातार चलती रही। नतीजतन अप्रैल 07 में उदयपुर व अजमेर सर्किल को जयपुर के अधीन कर दिया गया। वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृतियों में देरी के चलते अप्रैल 08 में अजमेर में जोनल सीई के दफ्तर की स्थापना कर दी गई।
तब से यह दफ्तर वहीं काम रहा था।
मैं जर्मनी गया था। अजमेर में दफ्तर स्थापित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। सभी कार्य जल्दी ही वहां होने लगेंगे। कब तक यह कार्रवाई होगी इस बारे में सचिव ही जानकारी दे सकते हैं। अजमेर में स्थाई भवन बनना भी प्रस्तावित है। -एनसी शर्मा, जोनल चीफ इंजीनियर
110 सब डिवीजन हैं अधीन
सर्किल के अधीन अजमेर के अलावा भीलवाड़ा, सीकर, झुंझुनूं तथा नागौर जिले में ट्रांसमिशन एवं कंस्ट्रक्शन से संबंधित पीएलसीसी, प्रोटक्शन तथा सिविल विंग के करीब 30 डिवीजन एवं 110 सब डिवीजन दफ्तर आते हैं। इनमें करीब 1300 अफसर-कर्मचारी कार्यरत हैं।
इनके जोनल चीफ इंजीनियर दफ्तर से संबंधित सभी काम के लिए अभी जयपुर ही जाना पड़ता है। असल में जोनल चीफ इंजीनियर दफ्तर से जुड़े सभी अफसर व कार्मिक जयपुर से जुड़े हैं और वे अजमेर आना नहीं चाहते।