ऑनलाइन कैट के फॉर्मेट पर असमंजस
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ऑनलाइन कैट के फॉर्मेट पर असमंजस

भोपाल. कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के ऑनलाइन होने और पैटर्न में बदलाव होने के साथ ही इस युवाओं को इसके फॉर्मेट में भी बदलाव की चिंता है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहे और टेस्ट की तैयारी पूर्व की तरह ही करते रहने की सलाह दे रहे हैं। इस बीच कुछ विशेषज्ञ इसके संभावित पैटर्न पर तो विचार कर ही रहे हैं प्रतिभागियों को भी इसके लिए पूरी तरह तैयार रहने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों की चर्चा ने टेस्ट को लेकर युवाओं की जिज्ञासाओं को बढ़ा दिया है।

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार कैट ऑनलाइन होने के बाद प्रतिभागियों को तैयारी में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपनी तैयारी के साथ ही कंप्यूटर फ्रेंडली होने का प्रयास करना चाहिए। इस बार प्रतिभागियों को जीमैट पर आधारित कंप्यूटर एडप्टिव टेस्ट या रुटीन में होने वाले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट से छात्रों को कैट देना होगा। दोनों फॉर्मेट में कुछ अंतर है इसलिए छात्रों को दोनों तरह के टेस्ट के लिए तैयार रहना चाहिए।

दोनों फॉर्मेट में उसी तरह टॉपिक्स से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे जिस तरह अब तक पूछे जाते थे। कप्ंयूटर एडप्टिव टेस्ट में जीमैट और जीआरई द्वारा प्रयोग किए जा रहे पैटर्न को अपनाया जाएगा। प्रश्न एक अनियमित तरीके से विशेष सॉफ्टवेयर के द्वारा चुने जाते हैं। टेस्ट का मकसद छात्र के बौद्धिक स्तर का पता लगाना होगा।

यदि छात्र ने प्रश्न का सही उत्तर दिया तो अगला प्रश्न कठिन होगा। इसका मतलब प्रश्नों के हल करने की गुणवत्ता भी पर्सेटाइल पोजिशन निश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगी। इस फॉर्मेट के हिसाब से कोई भी छात्र वर्तमान प्रश्न का उत्तर दिए बगैर अगले प्रश्न को हल नहीं कर सकता। एक बार उत्तर देने के बाद उसे बदला भी नहीं जा सकेगा।कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट में सवाल सीरियल के हिसाब से स्क्रीन पर आएंगे।

अगर छात्र किसी प्रश्न को बाद में हल करना चाहे तो एक प्रश्न छोड़कर दूसरे सवाल पर आ सकता है। टेस्ट को दौरान प्रश्नों के उत्तर भी बदले जा सकते हैं। कैट को साल में कई बार और किसी भी समय दिया जा सकता हैं। इसका स्कोर एक साल तक वैलिड रहेगा।

बढ़ रही है प्रतिस्पर्धा

कैट में प्रतिभागियों की संख्या लगातार बढ़ा रही है। 2003 में जहां देशभर में 95 हाजर छात्र इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वहीं 2008 तक यह संख्या बढ़कर 2 लाख 76 हजार पर पहुंच गई है। 2009 में कैट पूरी तरह ऑनलाइन होगा।



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