अजमेर.
एंटी करप्शन ब्यूरो के दल ने बुधवार को अजमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के सिविल इंजीनियर ओमप्रकाश भाटी को निर्माण ठेकेदार से 20 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। साथ ही साजिश रचने के आरोप में बैंक एमडी महेंद्र सिंह जावला को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
यह राशि निर्माण कार्य की मेजरमेंट बुक भरने के एवज में ली गई थी। आरोपी इंजीनियर का बयान है कि रिश्वत राशि में से ग्यारह हजार रुपए एमडी का हिस्सा था और उन्हीं की सहमति से रिश्वत ली थी। उधर, जावला ने इंजीनियर के बयान को झूठा करार दिया है। एसीबी ने आनासागर लिंक रोड स्थित जावला के मकान की भी तलाशी ली।
मामला एक नजर
सरवाड़ लिंक रोड निवासी निर्माण ठेकेदार कुलदीप कुमार भट्ट ने एसीबी को शिकायत की थी कि करीब 3 महीने पहले सरवाड़ में बैंक शाखा के भवन निर्माण का टेंडर उसके नाम खुला था। निर्माण कार्य कुल आठ लाख रुपए का था। दो महीने पहले बैंक की ओर से उसे 7.5 लाख का वर्क ऑर्डर जारी किया गया। लागत में से 6.22 प्रतिशत राशि पहले ही कम कर दी गई थी। फरवरी में काम शुरू कर करीब 4 लाख रुपए का काम उसने पूरा कर दिया है।
उसकी मेजरमेंट बुक भरने और भुगतान के एवज में जेईएन ओमप्रकाश भाटी उससे 10 प्रतिशत कमीशन मांग रहा था। भाटी ने उससे कहा था कि 7 प्रतिशत कमीशन एमडी जावला का तथा 3 प्रतिशत उसका खुद का है। कुलदीप का आरोप है कि इसके अतिरिक्त भाटी उससे करीब 10 हजार रुपए किश्तों में ले चुका था। भाटी और जावला ने करीब 32 हजार रुपए की मांग की थी। मना करने पर उन्होंने काम बंद करने को कहा था।
कार्रवाई
एसीबी सीआई हीरासिंह चौहान, निर्मल शर्मा और अन्य अफसरों ने शिकायत का सत्यापन कराया। कमीशन राशि के बारे में एमडी जावला, जेईएन भाटी और शिकायतकर्ता कुलदीप की बातचीत टेप कराई गई। 20 हजार रुपए कमीशन देना तय हुआ। एसीबी ने बुधवार दोपहर को कुलदीप को 20 हजार रुपए के केमिकल लगे नोट देकर बैंक भेजा।
कुलदीप वहां जेईएन भाटी से मिला और उसे रुपए दे दिए। भाटी ने खुद की टेबल पर ही उसमें से 11 हजार रुपए एक लिफाफे में डाले और शेष राशि जेब में रख ली। भाटी उसके बाद कुलदीप को एमडी के कक्ष में ले गया और उसी के हाथ से 11 हजार का लिफाफा जावला को दिलाया।
जावला ने लिफाफा खोले बगैर टबल पर रख लिया। हालांकि कुछ देर बाद जावला ने यह कहते हुए भाटी को लिफाफा वापस सौंप दिया कि बाद में दे देना। उधर, कुलदीप का इशारा पाकर एसीबी टीम एमडी के कक्ष में घुस गई। भाटी की जेब से 9000 रुपए और उसके कब्जे से लिफाफे में 11 हजार रुपए बरामद किए गए।
एमडी की सहमति
एसीबी सीआई हीरासिंह चौहान ने बताया कि आरोपी जेईएन और परिवादी के बयान से खुलासा हुआ है कि कमीशन राशि जावला की सहमति से तय हुई थी, जिसमें से जावला का भी हिस्सा था। यही कारण है कि जेईएन भाटी ने 20 हजार रुपए में से 11 हजार रुपए अलग निकाले थे। इस बारे में बातचीत का टेप एसीबी के पास है। जावला के खिलाफ भादंसं की धारा 120-बी के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।