भोपाल.
प्रदेश में बाघों के संरक्षण का जिम्मा ‘टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स’ को सौंपा जाएगा। इसके लिए मप्र पुलिस की तीन कंपनी प्रतिनियुक्ति पर वन विभाग लेगा, जो कान्हा, पेंच और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तैनात होंगी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने वन विभाग को फोर्स के गठन के आदेश दिए हैं। विभाग के अधिकारी फिलहाल आदेश का अध्ययन कर रहे हैं।
पिछले डेढ़ साल में प्रदेश में जिस तेजी से बाघों की संख्या कम हुई है। उससे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण बाघों के संरक्षण को लेकर चिंतित हो गया है। डेढ़ साल में विभिन्न स्तर से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राधिकरण ने प्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन का निर्णय लिया है। इस संबंध में वन विभाग को दो दिन पहले ही प्राधिकरण का आदेश प्राप्त हुआ है।
आदेश के अध्ययन के बाद फोर्स के लिए पुलिस बल प्रतिनियुक्ति पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जाएगा। टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की शुरूआत में प्रदेश के तीन पार्र्को में फोर्स को तैनात किया जाएगा। इनमें कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व शामिल हैं।
कैसे मिलेगा फोर्स : जब तक फोर्स का गठन नहीं होता है। तब तक वन विभाग पुलिस मुख्यालय से तीन कंपनी प्रतिनियुक्ति पर लेकर पार्र्को की निगरानी करेगा। हर पार्क में एक कंपनी तैनात की जाएगी, जो फील्ड डायरेक्टर के निर्देश पर काम करेगी। पुलिस बल को अधिकतम तीन साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर लिया जाएगा। इनको पार्र्को में पदस्थ करने से पहले जंगल में काम करने का दो माह का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मुख्यालय स्तर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) का नेतृत्व रहेगा।
एक कंपनी में 90 सदस्य . : फोर्स को पार्क की सुरक्षा का दायित्व सौंपा जाएगा। एक कंपनी में कुक, अर्दली और पुलिस कर्मियों को मिलाकर 90 कर्मचारी होते हैं।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन का आदेश दो दिन पहले प्राप्त हुआ है। अभी अध्ययन कर रहे हैं। फोर्स की भरती न होने तक पुलिस मुख्यालय से प्रतिनियुक्ति पर पुलिस बल लेंगे।
-डॉ. एचएस पाबला प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)