नई दिल्ली/भोपाल.
मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह बात परेशान करने वाली हो सकती है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून तमिलनाडु व तटीय कर्नाटक में अटक गया है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अपनी गति खो चुका है और पिछले दो दिन में जरा भी आगे नहीं बढ़ा है। इससे अब इसके मध्यप्रदेश में समय से पहले पहुंचने की संभावनाएं भी कम हो गई हैं।
जानकारों के अनुसार इसे अपनी लय में आने मे कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा। 25 मई तक मानसून ने केरल, तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक के दक्षिणी हिस्से, उत्तर-पूर्व, तटीय उड़ीसा, पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अपनी आमद दर्शाई है। पिछले दो दिन में मानसून ने आगे की ओर कदम नहीं बढ़ाए हैं। इसके बावजूद मौसम विभाग ने इस साल ‘सामान्य बारिश के आसपास’ का दीर्घावधि अनुमान जताया है।
आंकड़ों के हिसाब से मानसून के सीजन में बारिश का दीर्घावधि औसम 96 प्रतिशत (89 सेंटीमीटर) के लगभग रहता है। केरल में समय से करीब आठ दिन पहले 23 मई को पहुंचा मानसून दो दिन बाद 25 मई को मंगलौर को छू चुका था। मौसम विभाग का कहना है कि इसके एक सप्ताह के भीतर मानसून मुंबई में पहुंच जाना चाहिए। वैसे मुंबई में मानसून के पहुंचने की तारीख 10 जून है। मध्यप्रदेश में सामान्य रूप से १५ जून के आसपास मानसून दस्तक देता है।
‘आइला’ का असर : मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में आए तूफान ‘आइला’ का महाराष्ट्र के मौसम पर असर पड़ सकता है। इस तूफान से महाराष्ट्र के वायुमंडल की ऊर्जा में कमी आ सकती है, जिसका असर मानसूनी गतिविधियों पर पड़ सकता है।
इस चाल से आगे बढ़ा मानसून
20 मई - अंडमान निकोबार द्वीप समूह
23 मई - केरल और तमिलनाडु
25 मई - कर्नाटक, उड़ीसा के तटीय इलाके, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत। दो दिन से इससे आगे नहीं बढ़ा है।
सामान्य तौर ये चाल रहती है मानसून की
20 मई - अंडमान निकोबार में
1 जून - केरल, तमिलनाडु
5 जून - कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, असम सहित अन्य उत्तर-पूर्वी राज्य
10 जून - महाराष्ट्र, दक्षिण छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के तटीय भाग
15 जून - गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार
1 जुलाई - राजस्थान व उत्तर भारत