जयपुर. कृषि जमीनों पर बसी आवासीय कॉलोनियों का बरसों से अटका हुआ नियमन अब शुरू होगा। जयपुर विकास प्राधिकरण अगले माह से नियमन का बड़ा अभियान छेड़ने जा रहा है। इसके लिए सुविधा क्षेत्र, अवाप्त जमीनों पर बसी कॉलोनियों के नियमन के लिए नियमों में संशोधन भी किया जाना प्रस्तावित है। फिलहाल जयपुर में 1300 से अधिक कॉलोनियां नियमन से वंचित है।
जेडीए आयुक्त उमेश कुमार के अनुसार, गैर अनुमोदित योजनाओं में लगभग 2 लाख मकान बने हुए हैं। अब इनके नियमन का काम हाथ में लिया जाएगा। इसके लिए आवश्यक हुआ तो नियमों में फेरबदल भी किया जाएगा। रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करने, सुविधा क्षेत्र में कब्जे और अन्य कारणों से अटकी हुई कॉलोनियों के नियमन का रास्ता खोलने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजकर ढील मांगेंगे। उन्होंने कहा कि नियमन से वंचित कॉलोनियों की संख्या और बाधाओं को देखते हुए यह काम एक-दो माह में पूरा करना तो संभव नहीं है, लेकिन सतत अभियान चलाकर लोगों को राहत दी जाएगी।
जेडीए अधिकारियों के अनुसार टाइटल क्लियर नहीं होने के कारण 988 कॉलोनियों का बरसोें से नियमन नहीं हो पा रहा है। इनमें इकोलॉजिकल जोन में काटी गई कॉलोनियां, टाइटल डिस्प्यूट, अपर्याप्त दस्तावेज, भूमि संबंधी विवाद और अन्य संस्थाओं के मालिकाना हक की जमीन पर बनी कॉलोनियां शामिल हैं। नियमन से शेष रही कुल 1341 कॉलोनियों में से प्रथम चरण में उन गृह निर्माण सहकारी समितियों की योजनाओं का नियमन होगा जिनमें किसी प्रकार का विवाद नहीं है। वर्तमान में विवाद रहित कॉलोनियों की संख्या 350 के करीब है।
रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करने वाली कॉलोनियों का होगा सर्वे : जेडीए ऐसी कॉलोनियों का भी सर्वे कराएगा जिनमें वर्ष 1999 से पहले लोग मकान बनाकर तो रह रहे हैं, लेकिन जिनका जेडीए में रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं हुआ।
सर्वे में यह पता लगाया जाएगा कि इन कॉलोनियों में कितने मकान बने हुए हैं और कब से बने हुए हैं। इनके नियमन का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। सर्वे के दौरान इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों से जेडीए पानी-बिजली के बिलों के आधार पर तय करेगा कि यहां मकानों का निर्माण कट ऑफ डेट 22 अक्टूबर 1999 से पहले हुआ या नहीं।