जयपुर.
सीबीएसई की हैल्पलाइन पर कमोबेश स्टूडेंट्स ऐसी ही परेशानियां शेयर कर रहे हैं। आज के सिनैरियो की बात की जाए तो कई ऐसे परेंट्स मिलेंगे जो बच्चे ने क्या परफॉर्म किया, इस पर ज्यादा ध्यान देते हैं। सीनियर सैकंडरी करने वाले बच्चों के साथ उनके पेरेंट्स के भी कॉल आते हैं। कम स्कोर करने वालों कैंडीडेट्स को लगता है कि इम्प्रूव किया जा सकता है।
रिजल्ट डिक्लेयर होने के बाद से ही स्टूडेंट्स को गाइड करने के लिए के लिए सेंटल बोर्ड ऑफ सैकंडरी एजूकेशन की ओर से 20 मई से हैल्पलाइन स्कीम शुरू की गई है। यह 3 जून तक चलती रहेगी। पहले दिन हर एक काउंसलर ने 200 कॉल लिए थे।
विद्याश्रम स्कूल के उपेन्द्र कौशिक कहते हैं, रोजाना 50-60 कॉल आते ही हैं। काउंसलर्स कहते हैं, ज्यादतर स्टूडेंट्स यह जानना चाह रहे हैं कि अब वे क्या करें। रीचैकिंग की क्या प्रक्रिया है। क्या रीचैकिंग से मार्क्स बढ़ जाते हैं। ऐसे में हम लोग सिर्फ यह कहते हैं रीचैकिंग नहीं होती रीटोटलिंग होती है। अगर आप श्योर हैं तो ही फॉर्म भरिए स्कूल में फॉर्म मिलता है।
राजस्थान में हैल्पलाइन से टैली काउंसलिंग के लिए 3 काउंसलर्स नियुक्त किए गए हैं। इनसे फोन पर बात कर काउंसलिंग की जा रही है। काउंसलर सीमा शर्मा कहती हैं सीनियर सैकंडरी में मेरे पास ज्यादातर साइंस के स्टूडेंट्स के ही फोन आए। इम्पूव करने का ऑप्शन बहुत से स्टूडेंट्स ने मेरे सामने रखा। मेरा सजेशन स्टूडेंट्स को यही है कि आगे की तरफ ध्यान दीजिए। जो हो चुका वह हो चुका। मैं स्टूडेंट्स को यही कहती हूं कि अभी आपको परसेंटेज कम लग रही है।
लेकिन ऐसा न हो आगे की पढ़ाई पर इस इम्प्रूवमेंट का कोई निगेटिव असर हो। फिर भी अगर नहीं मानते तो पुराने उदाहरण देती हूं कि बहुत से बच्चे अप्लाई तो करते हैं लेकिन एक दो परसेंट को छोड़कर नहीं दे पाते। किसी दूसरे बच्चे से तुलना बच्चे के लिए खतरनाक होती है। पेरेंट्स की तुलना में बच्चे को समझाना आसान होता है। इस तरह के पेरेंट्स की वजह से ही बच्च डिप्रैसिंग फेज में आता है। कुछ ऐसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मनोचिकित्सक तुषार जागावत और सविता जागावत ने हैल्प लाइन शुरू की है जहां स्टूडेंट अपनी समस्याओं और उनके हल के बारे में जान सकते है।