जयपुर.
सांगानेर की सुभाष कॉलोनी में बुधवार को भी दूषित पानी का खौफ छाया रहा। दिनभर में करीब ढाई सौ लोग कॉलोनी के आंगनवाड़ी केंद्र में बनाए गए चिकित्सा शिविर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचे।
उनमें से 20 को भर्ती करके दवाएं और ड्रिप दी गई। शाम तक इनमें से 17 लोगों को छुट्टी दे दी गई, जबकि तीन का इलाज जारी है। नए पीड़ितों में अधिकतर बच्चे हैं। इनके अलावा सोमवार व मंगलवार को भर्ती 27 मरीजों को भी छुट्टी दे दी गई।
दूसरी तरफ जलदाय विभाग के तीन इंजीनियरों ने कॉलोनी के लोगों की मौजूदगी में शाम को दस जगहों पर पाइपलाइन खुदवाकर लीकेज और पानी की जांच की। लोगों की तसल्ली के लिए अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता तथा कनिष्ठ अभियंता ने काफी लोगों की मौजूदगी में जगह-जगह से काटी गई मुख्य पाइपलाइन से निकल रहा पानी पीकर दिखाया कि यह दूषित नहीं है। इस पर आक्रोशित लोगों के सुर बदल गए और वे कहने लगे कि मुख्य समस्या गूलर बांध की है, जहां से उठने वाली दरुगध की वजह से भी बीमारियां फैल रही हैं। फिर भी इंजीनियरों का कहना था कि जब तक लोग संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक टैंकरों से पानी सप्लाई किया जाएगा।
तिवाड़ी ने दिया धरना: दूषित पानी के मुद्दे पर विरोध जताने सांगानेर के विधायक व पूर्व शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने सुबह साढ़े 11 बजे समर्थकों के साथ सांगानेर सिटी बस स्टेंड पर धरना दिया, जिसमें स्थानीय लोग भी मौजूद थे। तिवाड़ी ने मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार से पांच-पांच लाख रुपए की सहायता देने की मांग की।
नए मरीज: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को दिनभर में 20 मरीज आए जिनमें 16 को दवा देने के बाद छुट्टी दे दी गई।
समाजसेवी संस्थाएं आई आगे: सुभाष कॉलोनी के प्रभावित लोगों की सहायता के लिए कई समाज सेवी संस्थाएं आगे आई हैं। जरूरतमंदों को निशुल्क खून उपलब्ध कराने वाली संस्था जीवन ज्योति ग्रुप तथा शिवा जनसमस्या निवारण समिति के सदस्य दिनभर घर-घर जाकर बीमारों से मिले और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
सैंपल पर नाटक
सांगानेर स्थित रैगरों के बड़ा मोहल्ला में गंदे पानी की सप्लाई होने से आक्रोशित लोग सैंपल लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए और जांच की मांग करने लगे। अस्पताल प्रशासन ने सभी बोतलों का पानी सैंपल बोतलों में डालकर उन्हें सील कर दिया और बोतल जांच के लिए रख ली, लेकिन लोग उसे वापस मांगने लगे। बोतल लेने के लिए हुई छीनाझपटी में बोतल टूट गई और स्थानीय निवासी राजेश साहू के हाथों में कांच लग गए।
डायरिया मरीज बढ़े
शहर में गंदे पानी से प्रभावित क्षेत्रों के अलावा भी अस्पतालों में डायरिया के मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। डॉक्टरों के अनुसार अप्रेल से जुलाई महीने तक डायरिया का बैक्टीरिया ज्यादा सक्रिय रहता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने और खानपान में लापरवाही बरतने के कारण वे जल्दी बीमार हो जाते हैं। जेके लोन अस्पताल में अप्रेल में डायरिया से पीड़ित 944 बच्चे पहुंचे। मई में यह संख्या बढ़कर साढ़े 12 सौ से ज्यादा पहुंच गई है। इनमें 151 मरीजों को भर्ती किया गया है। जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. डीडी सिन्हा और डॉ. चेतन एस. शर्मा कहते हैं कि पानी को उबालकर पीना चाहिए।
पानी की 18 इंची सप्लाई लाइन टूटी
ब्रrापुरी स्थित जलदाय विभाग के पंप हाउस में बुधवार शाम साढ़े चार बजे पानी की रूटीन सप्लाई के दौरान 18 इंची पाइप लाइन टूट गई। अचानक बड़ी पाइप लाइन टूटने के बाद पंप हाउस में मौजूद कर्मचारियों ने पंप हाउस को बंद किया और मरम्मत कार्य शुरू करवाया गया। पाइप लाइन टूटने से ब्रrापुरी क्षेत्र की मोहन नगर, कागदीवाड़ा, लक्ष्मीनगर, शंकर कॉलोनी, मगोड़ी वालों की बगीची सहित आधा दर्जन कॉलोनियों में पानी की सप्लाई नहीं हो पाई। पाइप लाइन में पहले सी मामूली लीकेज था।
जब शाम को जैसे ही पंप हाउस को चलाया गया तो अधिक प्रेशर से पाइप लाइन टूट गई। पाइप लाइन टूटने के कुछ समय बाद ही पंप हाउस को बंद कर पानी की सप्लाई को रोक दिया गया। इधर सहायक अभियंता अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि पाइप लाइन टूटते ही मरम्मत कार्य शुरू करवा दिया गया तथा ज्यों ही पाइप लाइन सही होगी वैसे ही पानी की सप्लाई कर दी जाएगी।
एईएन व जेईएन से बातचीत एईएन प्रदीप गुप्ता
सुभाष कॉलोनी में दूषित पानी कैसे आ गया?
सीवर व पानी की पाइपलाइन की जांच करवा ली। दूषित पानी आया ही नहीं।
कलेक्टर के आदेशों के बावजूद यहां पर पहले नियमित रूप से सैंपल क्यों नहीं जांचे गए?
इस इलाके में टयूबवेल से सीधी आपूर्ति है।
पूरे मामले में जिम्मेदार कौन है?
जब बीमारी का कारण मालूम लगे। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
जेईएन वी.के. गुप्ता
प्रभावित इलाके में इसके पहले सैंपल कब लिए थे?
हमने तो सैंपल नहीं लिए हैं। शायद मोबाइल लैब वाले लेते रहते हैं।
लोगों का दूषित पानी आपूर्ति करने का आरोप है?
ऐसा नहीं है। अब टैंकरों से आपूर्ति कर रहे हैं।
फिर भी लोग बीमार हो रहे है?
-इस बारे में तो हम क्या कह सकते हैं। शायद गूलर बांध की सब्जी वगैरह से परेशानी हो।
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