जयपुर.
सुनीता और सुधीर पंत की लाड़ली निधि ने 95.4 परसेंट लाकर परिवार और समाज में उनका मान बढ़ा दिया। एग्जाम के दौरान घर के माहौल को देखते हुए दोनों को इतनी अच्छी उम्मीद नहीं थी।
सुनीता ने बताया कि घर में बीमार मामी सास की देखभाल हो रही थी। देखने वालों का आना-जाना लगा रहता था। पढ़ने का माहौल बिलकुल नहीं था। ऐसे में निधि कभी पड़ौस में, कभी फ्रैंड्स के घर तो कभी स्कूल में ही पढ़ाई करती।
इतना ही नहीं वह साइंस के पेपर के वक्त खुद बहुत बीमार हो गई। इस सबके बीच भी उसने पढ़ाई पर फोकस बनाए रखा। निधि की बड़ी बहन ने आईआईटी क्वालिफाई किया। दोनों ही एक-दूसरे को सपोर्ट करती हैं। निधि की इच्छा है कि वह अपने पेरेंट्स को तमाम खुशियां दें। उसके पापा-मम्मी हमेशा फ्लाइट से ही सफर करें।
संस्कार की गहरी जड़ें
तारा और अनिल सुल्तानियां का बेटा गोपालम हनुमानजी और गणोशजी का भक्त है। तारा बताती हैं, बेटा रोज आधे घंटे पूजा करता है। धार्मिकता ने उसकी नैतिक संस्कार की जड़ें गहरी कर दीं। वह हर फैसला सोच-समझकर करता है। उसने बिना ट्यूशन और कोचिंग के स्टडी की। जबकि उसके फ्रैंड्स ने उसे कई बार कहा कि बिना ट्यूशन के तुम्हारे अच्छे नंबर नहीं आएंगे, लेकिन उसने स्टडी अपने आप ही की। नतीजा सबके सामने है। उसने अपनी सही समझ को साबित कर दिखाया।
होनहार बिरवान के होत चीकने पात
शैली और आर.के. लूथरा को बेटे स्नेहिल (95.2) पर गर्व है। उन्हें पूरा भरोसा है कि वह अपने लक्ष्य को हासिल करके ही रहेगा। शैली कहती हैं, उसमें तीन साल की उम्र से ही पढ़ने में रुचि देखी। खुद की प्लानिंग पर ही काम करता है। हमें कभी भी बोलने की जरूरत नहीं पड़ी कि बेटा पढ़ो। हां, उसने पापा से सुव्यवस्थित जीवन जीने की कला सीखी। उसमें दूसरों से बेहतर करने की ललक है इसीलिए अच्छा कर पाया।
मां को श्रद्धांजलि
विभोर गोयल फैमिली का नाम रोशन कर मां को श्रद्धांजलि देने की ख्वाहिश रखता है। उसके दादाजी बी.बी. गोयल बताते हैं, आठ साल पहले विभोर की मां शांत हो गईं थीं। इसके बाद दादी से उसे मां की ममता मिली। बेशक घर का माहौल बच्चों की नींव बनाता है। उसकी तीन बुआओं में दो डॉक्टर और एक इंजीनियर है। 95.4 परसेंट आने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं है। उसे और भी बेहतर करना है। फिलहाल वह ओलम्पियाड की तैयारी में है।
सभी फ्रैंड्स एक जैसे
राजकुमार अग्रवाल बेटे रजत (95 परसेंट) के अधिक पढ़ने से परेशान हो जाते हैं। वे कहते हैं, बेशक इसकी सफलता का श्रेय उसकी मां को है। पिता तो आमतौर पर आर्थिक मदद ही करते हैं। बच्चे की नींव मजबूत करने में मां की भूमिका बेमिसाल है। रजत का पढ़ाई से इतना लगाव है कि वह स्ट्रैस में आ गया था। एक-एक घंटे के अंतर में अलार्म लगाकर सोता। उसके सिर में दर्द शुरू हो गया, जिससे न्यूरोसर्जन के पास लेकर जाना पड़ा। उसके सभी फ्रैंड्स उसी की तरह पढ़ाकू हैं।
दादाजी हैं आदर्श
शैली और संजय कुमार का बेटा शुभम (94.8 परसेंट) दादाजी से अधिक प्रभावित है। उसके फैमिली में सभी जेंट्स रुड़की आईआईटी से पढ़े हुए हैं। इसका गहरा असर उसके मस्तिष्क पर है। शैली कहती हैं, कॉम्पिटीशन के समय बच्चे एक-दूसरे से आगे आने की सोचते हैं। शुभम 12वीं में इससे अधिक नंबर लाने की उम्मीद रखता है।
मम्मी ने करवाई प्रैक्टिस
अंजू अग्रवाल ने बेटी खुशहाली को दस साल के अनसॉल्ड पेपर सॉल्व करवाए। वे बताती हैं, बेटी एग्जाम के समय नर्वस थी। उसके साथ बैठकर उसकी प्रॉब्लम्स को दूर करने में मदद करती थी। इस दौरान घर का माहौल भी डिस्टर्ब था। उसकी दादी की तबियत ठीक नहीं थी। इसी दौरान का फ्रैक्चर और फिर ऑपरेशन हुआ। खुशहाली अपनी दादी के स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित थी।