कोटा. अंकेक्षण विभाग की टीम ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में वर्ष 2007 में तीन परीक्षाओं के लिए कर्मचारियों व प्रोफेसरों को बांटे गए 37 लाख रुपए के ओवरटाइम को बिना रिकॉर्ड भुगतान किया हुआ माना है। इसकी वसूली के लिए विवि प्रशासन व राज्य सरकार को लिखा जा रहा है।
अंकेक्षण विभाग के संयुक्त निदेशक रामगोप मीणा ने बताया कि आरटीयू में वर्ष 2007 में आरपीईटी, आरमेट, आरएमकेट की परीक्षाएं संचालित करने के बदले 350 कर्मचारियों, अधिकारियों व प्रोफेसरों को ओवरटाइम का भुगतान किया गया था। विभाग की टीम ने विवि प्रशासन से भुगतान संबंधी रिकॉर्ड मांगा, लेकिन वे इसे उपलब्ध नहीं करवा पाए। इस पर टीम ने इसे बिना रिकॉर्ड व बिना नियमों के भुगतान उठाना माना है।
इसकी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, जिसे राज्य सरकार व विवि प्रशासन को दिया जा रहा है। इसमें इस भुगतान को संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से वसलू करने के लिए लिखा गया है। उन्होंने बताया कि जांच में फर्नीचर खरीद व पदोन्नतियों में भी काफी अनियमितताएं मिली हैं। इसके लिए रजिस्ट्रार से रिकॉर्ड मांगा गया है, लेकिन कुछ रिकॉर्ड अभी भी नहीं मिला है। इसके मिलते ही जांच पूरी हो जाएगी।
रिपोर्ट मिलने के बाद लेंगे निर्णय
अंकेक्षण विभाग की टीम की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही अधिकारियों व कर्मचारियों से दिए गए ओवरटाइम को पुन: वसूलने के बारे में निर्णय लिया जाएगा। अभी इस बारे में रिपोर्ट नहीं मिली है। -डॉ. पीएल अग्रवाल, कार्यवाहक कुलपति, आरटीयू