आत्मरक्षा के लिए कराटे को चुना
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आत्मरक्षा के लिए कराटे को चुना

चंडीगढ़. Rupindar आत्मरक्षा के लिए ही कराटे को चुना था। शौक कब जुनून में बदला पता ही नहीं चला। यह कहना है सेक्रेड हार्ट स्कूल-26 की ब्लैक बेल्ट कराटे चैम्पियन रुपिंदरजीत कौर का। रुपिंदर ने सीबीएसई 10वीं के नतीजों में 90.4 फीसदी अंक हासिल किए हैं। रुपिंदर नॉन मेडिकल में एडमिशन लेकर पायलेट बनना चाहती है। रुपिंदर ने कराटे के नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर कई खिताब अपने नाम किए हैं।

अभी तक उसने तीन गोल्ड, एक सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं। रुपिंदर ने बताया कि खेल के साथ पढ़ाई को मैनेज करना मुश्किल नहीं था। बस तय किया था रोज दो-दो घंटे कराटे की प्रैक्टिस और पढ़ाई को देने हैं।

Ravleen रवलीन कौर जुल्का ने बास्केट बॉल के साथ पढ़ाई में भी अपना दबदबा बनाया है। नेशनल लेवल पर कई पुरस्कार जीत चुकी सेक्रेड हार्ट स्कूल-26 की रुपिंदर ने सीबीएसई 10वीं के नतीजों में 94.6 फीसदी हासिल किए हैं। रवलीन बास्केटबॉल में भविष्य को उज्ज्वल नहीं समझती। कारण नेम और फेम की कमी होना। नॉन मेडिकल फिर आईआईटी से इंजीनियरिंग करने की इच्छुक रवलीन टाइम मैनेजमेंट को सबसे जरूरती समझती।

वहीं, पैसे की समस्या कितनी भी रही, लेकिन कभी भी मोनिका ने इसे पढ़ाई पर हावी नहीं होने दिया। नतीजतन मोनिका ने सीबीएसई 10वीं के नतीजों में 93.7 फीसदी अंक हासिल किए। गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल-38 की विद्यार्थी मोनिका का घर मोहाली जिले के घंडोली गांव में है।

स्कूल से गांव तक सीधी बस नहीं जाती थी, इसलिए कई बार उसे काफी पैदल चलना पड़ता था। पिता की मौत करीब 12 साल पहले हुई। मोनिका के मां कपड़े सिलकर गुजारा करती हैं। महज दो हजार रुपए में महीने का खर्च चलाना पड़ता है। मोनिका ने सोचा है कि डॉक्टर बनकर वह इस गरीबी से अपने साथ अपने घरवालों को निकालेगी।

90 % पर भी गारंटी नहीं

चंडीगढ़. कड़ी मेहनत से हासिल किए 90 फीसदी नंबर शहर के कॉलेजों में दाखिला दिलाने की गारंटी नहीं है। यह भी जरूरी नहीं कि यह बढ़िया नंबर पंसदीदा स्ट्रीम या पसंदीदा कॉलेज में दाखिला दिला सकें। प्लस टू लेवल के बेहतर नतीजों का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा कॉमर्स स्ट्रीम पर। कॉमर्स स्ट्रीम में कट ऑफ पिछले साल की अपेक्षा दो फीसदी ऊपर जाने की संभावना जताई जा रही है। इस वजह से इस बार फिर ह्यूमेनिटीज स्ट्रीम पर दबाव बढ़ेगा।

कॉमर्स स्ट्रीम
शहर में11 कॉलेज हैं। इनमें कॉमर्स के लिए सिर्फ 1600 सीटें हैं। इन सीटों में से भी बाहर के राज्यों के लिए 15 फीसदी आरक्षित होने से शहर के विद्यार्थियों के हिस्से में 1360 सीटें बचती हैं। प्लस टू से कॉमर्स स्ट्रीम में 90 फीसदी से ऊपर अंक लेकर पास होने वाले विद्यार्थियों के लिए यह सीटें बहुत ही कम हैं। इस बार भी कॉमर्स के लिए एसडी, डीएवी और एमसीएम डीएवी कॉलेजों में ज्यादा मारामारी रहेगी।

पिछले साल के दाखिला प्रोसेस पर गौर करें तो कॉमर्स में 90 फीसदी से ज्यादा अंक लेने वाले विद्यार्थियों की तादाद 250 से ज्यादा थी। जो इस बार 350 के आसपास है। इसी तरह पिछले वर्ष 650 विद्यार्थियों ने 85 से 90 फीसदी के बीच नंबर हासिल किए।

इस बार यही तादाद 800 के पार है। एसडी कॉलेज में ही कॉमर्स की 280 सीटों के लिए चार हजार विद्यार्थियों के आवेदन गए थे। यही हालत डीएवी कॉलेज का था। यहां 2500 विद्यार्थियों ने आवेदन किए। इस बार रिजल्ट क्वालिटी में सुधार आने से पिछले साल के बराबर सीटों के लिए और ज्यादा संघर्ष होगा। एसडी, डीएवी और एमसीएम डीएवी के अलावा दूसरे कॉलेजों में भी दाखिला के लिए किस्मत के भरोसे रहना होगा।

आर्ट्स (ह्यूमेनिटीज) पर बढ़ेगा दबाव

कॉर्मस में कड़ी स्पर्धा के बावजूद दाखिला न मिल पाने की वजह से इस बार आर्ट्स पर दबाव रहेगा। यानी पिछले कुछ वर्र्षो से आट्र्स की तरफ कम होता विद्यार्थियों का रुझान उन्हें मजबूरी में फिर इस स्ट्रीम की तरफ ला सकता है। लेकिन यहां भी दाखिला मिलना इतना आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह कि 11 कॉलेजों में आट्र्स की सिर्फ 5800 सीटें हैं। यानी कॉमर्स में आए बढ़िया नंबरों की वजह से आट्र्स में भी इस बार कट आउट बढ़ेगी।

क्या हैं विकल्प
बेहतर नंबर लेकर अगर मनपसंदीदा स्ट्रीम में दाखिला ने मिले तो चिंता की जरूरत नहीं। शहर के कॉलेजों में बीए के साथ कई दूसरे बढ़िया कोर्स करियर बना सकते हैं। बीबीए और बीसीए पुराने हो चुके हैं। फिर भी बीए में एडवरटाइजिंग प्रोमोशनल सेल्ज, आईटी, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, फंक्शनल इंग्लिश, मास कम्युनिकेशन और वुमन स्टडीज, इलेक्टिव इंग्लिश जैसे विषय में दाखिला के विकल्प खुले हैं।

दिल्ली से आ रहे विद्यार्थी
च्च्जब रिजल्ट क्वालिटी बढ़िया हो तो विद्यार्थियों को दाखिला के लिए स्पर्धा का सामना करना ही पड़ेगा। अब 98 फीसदी नंबर आ रहे हैं तो 90 वालों को भी दाखिला के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली जाने का ट्रेंड रिवर्स हो गया है। वहां दाखिला ने मिलने से विद्यार्थी यहां आते हैं। विद्यार्थियों में प्रतिभा है। सोच समझकर स्ट्रीम का चयन करें क्योंकि आज बहुत से दूसरे कोर्स भी कॉलेजों में शुरू हो चुके हैं।
- एसी वैद प्रिंसिपल एसडी कॉलेज

साइंस में दिक्कत नहीं
इस साल भी साइंसिज में दाखिला लेने वालों को ज्यादा मुसीबत नहीं होगी। वजह साइंस के लिए उतने ही विद्यार्थी होंगे जितनी सीटें हैं। इसमें में दाखिला न मिल सके, शायद ही ऐसा हो।



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