उपेक्षा का शिकार सूर्य मंदिर
Elections 2009 Divya Bhaskar Business Bhaskar Indiainfo DNA 3Dsyndication MyFM Mera Mobi


HomeKota Kota

उपेक्षा का शिकार सूर्य मंदिर

mandirसुल्तानपुर. क्षेत्र के बूढ़ादीत कस्बे के एक छोर पर आठवीं शताब्दी एवं नागर शैली में निर्मित प्राचीन सूर्य मंदिर जन-जन की आस्था का केन्द्र है। मंदिर परिसर में कई प्रजातियों के पक्षी कलरव करते हुए श्रद्धालुओं का मन मोहते नजर आते हैं। शाम को आरती के समय दर्जनों भक्तजन आरती लेने पहुंचते हैं।

ग्रामीण व मंदिर पुजारी हंसराज शर्मा व रामप्रसाद शर्मा ने बताया कि इस मंदिर में अनादिकाल से अखंड ज्योत जल रही है, जिसका स्थापना वर्ष आज दिन तक कस्बे के किसी भी व्यक्ति को पता नहीं है। बुजुगोर्ं का कहना है कि हमने तो शुरू से ही ज्योति जली देखी है।

यहां पर सबसे ज्यादा रविवार को श्रद्धालु आते हैं। ऐसा पर्यटन का गुमनाम स्थल आज सरकार द्वारा पर्यटन स्थल की सूची में शामिल होने का इंतजार कर रहा है। कई लोग यहां पिकनिक मनाने भी आने लगे हैं, लेकिन राज्य सरकार द्वारा ऐसे अद्वितीय मनमोहक स्थल की बार-बार उपेक्षा की जा रही है।

जिले के चुनिंदा मंदिरों में से एक सूर्य मंदिर

मंदिर विकास के लिए प्रयासरत संस्था आदित्य सेवा समिति ने कई बार मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को आग्रह करने पर १क् लाख रुपए का बजट दो वर्ष पूर्व सूर्य मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्तावित हुआ था, जिससे निर्माण कराया गया, जिसमें से सात-आठ लाख रुपए ही खर्च हो पाए, जिसमें मंदिर की जर्जर होती स्थिति से कुछ निजात मिली।

आदित्य सेवा समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र सुमन ने बताया कि संस्था द्वारा मंदिर को पर्यटन स्थल घोषित कराने के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों से व जनप्रतिनिधियों व राजनेताओं से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी। समिति के पूर्व कोषाध्यक्ष महावीर सेन ने बताया कि स्थानीय मंदिर कोटा जिले के पुनिंदा मंदिरों में से एक है और क्षेत्र का सबसे प्राचीन मंदिर है, जो कि पर्यटन की दृष्टि से भी मनमोहक नजारा प्रस्तुत करता है।

फिर भी इसको राज्य सरकार द्वारा उपेक्षा का शिकार बनाया जा रहा है। क्षेत्र के लोगों ने सूर्य मंदिर को शीघ्र ही पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल करने की मांग की है। आदित्य सेवा समिति के सदस्य पुरातत्व अधीक्षक से मिले तो उन्होंने लगभग ५क् लाख रुपए की राशि का कार्य शेष बताया, जिसके तहत सिंह द्वार, गार्डन, मुख्य बाजार से मंदिर तक पक्की सडक तथा पुरुष व महिलाओं के लिए सुविधा की आवश्यकता है।

लक्की बंजारा द्वारा एक ही रात में बनाया गया सूर्य मंदिर

ग्रामीण सोहन लाल गोयल सहित ग्रामीणों ने बताया कि यह सूर्य मंदिर लक्की बंजारा द्वारा बनाया गया था इसकी किवदंती है कि जहां सूर्य मंदिर है, वहां पहले घना जंगल बसा हुआ था। यहां पर लक्की बंजारा के ढेरे थे। उनकी गायें चरती थी।

उन गायों में से जो गाय अंदर जंगल में जाती थी, वह वहां पर एक सर्प की बांबी पर गाय सारा दूध छोड़ आती थी। यह दृश्य देख उस बंजारे ने मंदिर बनाने का प्रण लिया और एक ही रात्रि में मंदिर बनाया गया।

सूर्य मंदिर का लेख

सूर्य मंदिर के बारे मंे जानकारी देते हुए बताया कि सूर्य मंदिर बूढ़ादीत मतलब बूढ़ा आदित्य अर्थात पुराना सूर्य है। यहां इस प्राचीन सूर्य के कारण इस ग्राम का नाम बूढ़ादीत पड़ा है। मंदिर के गर्भ गृह में आज भी सूर्य भगवान की नवीन संगमरमर की प्रतिमा है। आगे का सभामंडप अठारहवीं शताब्दी में निर्मित प्रतीत होता है।

संभवतया १७वीं शताब्दी में कभी मुस्लिम आक्रमणकारियों ने इसके सभामंडप को पूर्णतया नष्ट कर दिया था तथा बाद में फिर १८ वीं शताब्दी में इस भाग का पुनर्निर्माण किसी हिंदू शासक द्वारा कराया होगा। यह देवालय पुर्वमुखी है। गर्भ गृह के द्वार पर मध्य में सूर्य का अंकन है।

गर्भ गृह की बाहरी दीवारों पर मध्य मंे सूर्य प्रतिमा दक्षिण दीवार के मध्य में लक्ष्मीनारायण गरुढ पर सवार एवं उत्तरी दीवार की मध्यताक में जय महेश्वर नंदी पर सवार मुख्य भाग में वरुण प्रतिमा तथा दिगपालों का अंकन है। सुर संदरियों काटा निकालती दर्पण पर अगडाई लेती नागर शैली में है। इस क्षेत्र का यह महत्वपूर्ण सूर्य मंदिर है।



   Bookmark and Share




अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: