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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार चिंता का विषय नहीं है। इस हार की जिसको समीक्षा करना है करे, हम अपना काम करते रहेंगे।
श्री भागवत ने इस बात पर खुशी जताई कि चुनाव में इस बार मतदाताओं ने दो राष्ट्रीय दलों के पक्ष में वोट किया। छोटे-छोटे दलों और वामपंथियों की हार को उन्होंने राष्ट्रहित में अच्छा संकेत बताया। उन्होंने युवाओं से कहा कि पूरा देश आपकी ओर आशाभरी नजरों से देख रहा है। देश का भविष्य आपके कंधों पर है इसलिए भविष्य की योजनाएं बनाकर काम करें। हमें नए भारत का निर्माण करना है।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलिंद मराठे ने परिषद की उपलब्धियों पर प्रसन्नता जाहिर की और आने वाले दिनों की चुनौतियों की संक्षिप्त चर्चा की। बैठक में पिछले साल भर के काम की समीक्षा होगी और अगले साल भर के लिए कार्यक्रम तय किया जाएगा। परिषद इस तीन दिवसीय आयोजन में रैगिंग पर भी चर्चा करेगी।
प्रारंभिक सत्र में प्रो. मिलिंद मराठे ने कहा कि शिक्षा का तेजी से व्यवसायीकरण हो रहा है और विद्यार्थी परिषद लगातार इसके खिलाफ लड़ रही है। महाराष्ट्र में परिषद के प्रयासों से कालेजों की फीस तय करने के लिए एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। प्रवेश परीक्षा खुद लेने पर अड़े निजी कालेजों के खिलाफ भी परिषद ने लड़ाई लड़ी।
परिषद ने अजा-जजा हास्टलों की स्थिति पर एक सर्वे किया और इसके नतीजों के आधार पर अदालत की लड़ाई लड़ी। इस मामले में 11 राज्यों को कोर्ट ने नोटिस भेजी है। श्री मराठे ने बताया कि शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ लड़ाई में पालकों का भी साथ मिल रहा है। मदरसा बोर्ड को सीबीएसई के बराबर दर्जा देने के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
श्री मराठे ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले परिषद ने मतदाताओं से जाति-धर्म से ऊपर उठकर मतदान करने की अपील की। मतदान का कम प्रतिशत जरूर चिंता की बात है लेकिन मतदाताओं ने एक स्थिर सरकार के लिए वोट दिया है, कम वोट पाकर सत्ता का खेल खेलने वालों को नकारा है, यह स्वागत योगय है। दूसरे सत्र में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने परिषद के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। परिषद के राष्ट्रीय मंत्री समय बंसोर ने कहा कि डाक्टरों का गांव जाने से इनकार करना छत्तीसगढ़ में एक बड़ा मुद्दा है।
इस मुद्दे पर दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा ने स्वीकार किया कि नई पीढ़ी में धन केंद्रित सोच बढ़ रही है, समाज को कुछ देने की भावना कम होती जा रही है। यह शिक्षा में मूल्यों की कमी का परिचायक है। इसके लिए प्राथमिक स्तर से उपाय करने होंगे।