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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. कई साल पुराना अभिलेख अपने पास रखने के आरोप में कलेक्टर ने एक क्लर्क की चार वेतन वृद्धि रोकने का नोटिस जारी किया है। इसी तरह डिप्टी कलेक्टर के औचक निरीक्षण में अभिलेखागार में भी गड़बड़ी पकड़ी गई है।
कलेक्ट्रेट की नजूल शाखा में पूर्व में पदस्थ रहे क्लर्क अमृत लाल इंदुरखिया को कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने चार वेतन वृद्धि रोकने का नोटिस दिया है। इस लिपिक पर आरोप है कि इसने नजूल में अपनी पदस्थी के दौरान जो जाति व मूल निवासी प्रमाण-पत्र जारी कराए थे, उनसे संबंधित अभिलेख कार्यालय में नहीं जमा कराए।
क्लर्क लगभग सात साल तक उक्त अभिलेख अपने पास ही रखे रहा। इससे विभिन्न विभागों में कार्यरत शासकीय सेवकों को जारी जाति व मूल निवासी प्रमाण-पत्रों का सत्यापन नहीं हो सका। कलेक्टर ने इस मामले को गंभीर मानते हुए लिपिक को प्रथम दृष्टया ही दोषी पाया है और कार्रवाई की है।
महाप्रबंधक भी फंसे
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक संतोष श्रीवास्तव के बिना इजाजत मुख्यालय छोड़ने पर कलेक्टर ने ऐतराज व्यक्त किया है। बताया जाता है कि महाप्रबंधक ने अवकाश संबंधी आवेदन बिना कलेक्टर की अनुशंसा के अपर संचालक उद्योग के पास भेज दिया था। इससे अवकाश संबंधी निर्देशों की अवहेलना हुई है। कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने महाप्रबंधक को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है।
अभिलेखागार में भी मिली गड़बड़ी
डिप्टी कलेक्टर विनोद चतुर्वेदी ने पिछले दिनों मोतीमहल स्थित राजस्व अभिलेखागार का औचक निरीक्षण किया। श्री चतुर्वेदी को यहां 50 ऐसे आवेदन मिले जो काफी समय से लंबित थे और आवेदकों को नकल का प्रदाय नहीं किया गया था।
उन्होंने निरीक्षण रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। श्री चतुर्वेदी ने आवेदनों के लंबित रहने के मामले में प्रथम दृष्टया यहां पदस्थ लिपिकों को दोषी माना है। बताया जाता है कि डिप्टी कलेक्टर ने इसके पूर्व 6 अप्रैल को भी मोतीमहल अभिलेखागार का निरीक्षण किया था।
उस समय भी कई आवेदन लंबित रहने पर उन्होंने स्टाफ को काफी पुराने हो चुके अभिलेख को नष्ट करने व लंबित आवेदनों का समय सीमा में निराकरण करने को कहा था। इसके बाद भी लिपिकों के कामकाज में सुधार नहीं आने पर अब कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।