150 साल बाद बनाया नया देवरथ
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150 साल बाद बनाया नया देवरथ

बंजार/मंडी। जिला मुख्यालय से २५ किमी. दूर थरास गांव में देवता मरकडेय ऋषि के 150 साल बाद बने देवरथ की प्राण प्रतिष्ठा कर दी गई। इसमें सराज घाटी के ६ और रूपी वैली के एक दर्जन देवी-देवताओं के कारकूनों ने शिरकत की।

मंगलवार सवा सात बजे देवता के आदेशानुसार आचार्य देव प्रकाश ने षोडषोचार के द्वारा चांदी जड़ित रथ की प्राण प्रतिष्ठा कराई। बुधवार तड़के देवता कारदार जीवन प्रकाश की अगुआई में हाट बजौरा की देवी सत्यवती के कारदार छबील दास ने एक दर्जन देवी देवताओं के चेलों की मौजूदगी में देवरथ का पवित्र जल से स्नान कराया और जल के छींटे मौजूद सभी हारियानों पर फेंके।

कमेटी प्रधान पृथ्वी ¨सह पाल और सलाहकार बालमुकुंद ने बताया कि लगभग १५क् साल बाद देवता के रथ को बदल कर नए सिरे से इसका निर्माण किया गया है जिसमें ७ किलो चांदी के मोहरे लगाए गए। अष्टधातु से बना पुराना मुख मोहरा यथावत ही उसी स्थान में लगाया गया जहां पुराने रथ में उसे जगह दी गई थी।

इस देवरथ में सोना नहीं लगता जबकि शेष देवता स्वर्ण जड़ित होते हैं। देवता का मूल स्थान ब्यास और गोमती नदी के संगम स्थल स्थित मकराहड़ में है। देवता का मुख मोहरा इसी स्थान पर सदियों पूर्व गांव की एक महिला को खुदाई करते समय मिला था। कारीगर ३ मई से रथ बनाने में जुटे थे। बुधवार को लगाए भंडारे में 5 हजार लोग शामिल हुए।

मंडी के मंदिरों को मिले 11 लाख

पारंपरिक शैली के मंदिर अब अपना अस्तित्व नहीं खोएंगे। भाषा कला एवं संस्कृति विभाग ने जिले के छह मंदिरों के लिए 11 लाख 37 हजार रुपए दिए हैं। मंदिरों के संवद्र्घन एवं संरक्षण को लेकर चल रही इस योजना के तहत लघु हरिद्वार कांढापतन सहित अन्य मंदिरों पर यह राशि खर्च की जाएगी।

योजना के तहत मंडी जिला के तिंदरी महादेव मंदिर बरयोग छतरी पर 1.25 लाख, तेवनी महादेवी करसोग पर 4 लाख, नीलकंठ महादेव मंदिर कांढापतन के लिए 2.5 लाख, पुंडरीक ऋषि पंजाई पर 2.5 लाख, सिद्घ बाबा बालक नाथ मंदिर सिद्घ कोठी पर एक लाख और श्यामाकाली मंदिर बलद्वाड़ा के लिए 12 हजार 500 रुपए की राशि खर्च होगी।

पिछले साल भी विभाग ने मंदिरों के संरक्षण के लिए 25 लाख रुपए दिए थे। इसमें ममलेश्वर महादेव करसेाग के लिए 5 लाख, मूल महादेव माहुंनाग मंदिर करसोग के लिए 8 लाख और मगरू महादेव के लिए 4 लाख रुपए दिए गए थे। जिला भाषा एवं संस्कृति अधिकारी राजकुमार सकलानी ने बताया कि विभाग मंदिरों के संरक्षण के लिए प्रयासरत है।



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