आज हिमाचल रचेगा नया इतिहास
Elections 2009 Divya Bhaskar Business Bhaskar Indiainfo DNA 3Dsyndication MyFM Mera Mobi


HomeShimla Shimla

आज हिमाचल रचेगा नया इतिहास

शिमला। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के मंत्रीमंडल कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले वीरभद्र सिंह तीसरी बार केंद्र में मंत्री बनेंगे। पांच बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह इससे पहले भारत की पहली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में दो बार मंत्री रह चुके हैं।

नेहरू परिवार के करीबी और इंदिरा गांधी की सरकार में मंत्री रहने का पुरस्कार उन्हें15वीं लोकसभा में कैबिनेट मंत्री के रूप में मिल रहा है। प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार है कि जब दो कैबिनेट मंत्री हिमाचल का प्रतिनिधित्व करेंगे। 75 वर्षीय वीरभद्र सिंह उत्तरी भारत में कांग्रेस के वरिष्ठ सांसदों में से हैं इस कारण भी केंद्रीय नेतृत्व उन्हें इग्नोर नहीं कर सका।

वीरभद्र सिंह पहली बार दिसंबर 1976 से मार्च 1977 तक केंद्र की केंद्र में पर्यटन और नागरिक उड्डयन उपमंत्री रहे और बाद में सितंबर 1982 से अप्रैल 1983 तक इंदिरा गांधी ने उन्हें उद्योग राज्यमंत्री बनाया। 26 साल बाद केंद्र की राजनीति में लौटने वाले वीरभद्र सिंह को हिमाचल का मुख्यमंत्री बनाने का श्रेय भी इंदिरा गांधी को ही जाता है।

नेहरू परिवार से नजदीकियों का लाभ उन्हें1983 में मिला जब इंदिरा गांधी ने उन्हें हिमाचल का मुख्यमंत्री बनाकर भेजा। वीरभद्र सिंह इंदिरा गांधी के विश्वास पर खरे उतरे और सर्वाधिक पांच बार प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने का गौरव हासिल किया।

पहली बार होंगे प्रदेश से दो केंद्रीय मंत्री

स्टोक्स और विप्लव गुट को झटकाi>वीरभद्र सिंह के कैबिनेट मिनिस्टर बनने से विद्या स्टोक्स और विप्लव ठाकुर को झटका लगा है। प्रदेश कांग्रेस के संगठन में अच्छी पकड़ रखने वाली कांग्रेस की दोनों पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ंके चुनाव क्षेत्र में पार्टी पिछड़ी है। वीरभद्र सिंह अगर मंत्री बनते तो इन लोकसभा में इन क्षेत्रों में बूथवार पड़ी वोटों का पोस्टमार्टम होना था। इसलिए वीरभद्र सिंह को पार्टी के अंदर दिल्ली में राजनीतिक हाशिए पर धकेलने की कोशिशें चली हुई थी।

नाटकीय घटनाक्रम के बीच बुधवार को कांग्रेस आलाकमान ने मंडी से सांसद वीरभद्र सिंह को कैबिनेट में शामिल कर लिया। जद्दोजहद के बाद मिला यह पद वीरभद्र के सियासी कद का ईनाम है।

प्रदेश कांग्रेस की सियासत में उन्हें हाशिये पर धकेलने की कोशिशों को दरकिनार कर वीरभद्र सिंह ने अपने विरोधियों को यह दिखा दिया है कि दिल्ली दरबार में आज भी उनकी गहरी पैठ है।

वीरभद्र सिंह के नाम पांच बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने और पांच बार ही सांसद बनने का रिकॉर्ड है। विपक्ष में होते हुए भी मंडी का किला जीतने का रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है।

कांग्रेस में रजवाड़ों की फौज मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जन सिंह, कर्ण सिंह ने भी दसजनपथ में वीरभद्र सिंह की जमकर पैरवी की। सोनिया के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल, आरके धवन काफी पहले से वीरभद्र सिंह के नाम की सिफारिश कर रहे थे। परदे के पीछे के घटनाक्रम के बाद वह मंत्री बनने में कामयाब रहे।

वीरभद्र सिंह का राजनीतिक सफर

23 जून 1934 को रामपुर के सराहन में जन्म। पिता पदम सिंह बुशहर के राजा।

प्रारंभिक शिक्षा शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से। दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से बीए (ऑनर्स)। दिल्ली से हिस्ट्री में एमए।

1962, 1967, 1972, 1980 और 2009 में सांसद बने।

1980 में यूएनओ की जनरल असेंबली के सदस्य।

दिसंबर 1976 से मार्च 1977 तक केंद्र की इंदिरा गांधी सरकार में पर्यटन, नागरिक उड्डयन उपमंत्री रहे।

सितंबर 1982 से अप्रैल 1983 तक उद्योग राज्यमंत्री।

1990, 1993, 1998, 2003 और 2007 में रोहडू विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित।

अप्रैल 1983 में पहली बार मुख्यमंत्री बने।

दिसंबर 1993 से मार्च 1998 तक तीसरी बार सीएम।

मार्च 2003 को पांचवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

2009 में मंडी से चुनाव जीते।

.. और यूं पहुंचे दिल्ली

वीरभद्र सिंह चुनाव जीतने के बाद अगले दिन 17 मई को दिल्ली रवाना।

विरोधी खेमे ने भी दिल्ली दस्तक दी।

दिल्ली से उड़ी खबर, मांग कर नहीं लेंगे कोई पद।

22 मई को सरकार का गठन।

चर्चा के बावजूद नहीं मिला मंत्री पद।

आनंद शर्मा के कैबिनेट मंत्री बनने से वीरभद्र समर्थक मायूस।

दिल्ली की कोठी में डेरा जमाया, मुंह पर लगाई चुप्पी।

शपथ ग्रहण समारोह से रहे दूर।

दस जनपथ से नजदीकियां रखने वाली पूर्व मंत्री हर्ष महाजन की बहन देवी चेरियन के जरिए लॉबिंग।

हर्ष महाजन ने दिल्ली में की जमकर की लॉबिंग।

अगर मंत्री नहीं बनाया तो लोस से त्यागपत्र देने की अफवाह।

23, 24 मई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिलने की कवायद।

25 को सोनिया गांधी से मुलाकात

26 को मंत्रीमंडल विस्तार में मंत्री बनाने का आश्वासन।

27 को प्रधानमंत्री कार्यालय से मंत्री बनने का निमंत्रण पत्र

अंबिका सोनी को मिलाकर पंजाब से केंद्र में तीन मंत्री होंगे। आनंद शर्मा के साथ वीरभद्र सिंह को शामिल कर लिए जाने के बाद पहला अवसर होगा जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में इस छोटे से राज्य के दो कैबिनेट मंत्री होंगे। इस बार सबसे ज्यादा नुकसान हरियाणा को हुआ।

इंद्रजीत को मंत्री न बना पाने की सूचना प्रधानमंत्री ने उन्हें फोन पर दी। 78 वर्षीय वीरभद्र सिंह सबसे उम्रदराज कैबिनेट मंत्री और 46 वर्षीया कुमारी शैलजा सबसे युवा कैबिनेट मंत्री होंगी। पहली बार कैबिनेट मंत्री बनने जा रहे चंडीगढ़ के 61 वर्षीय पवन कुमार बंसल की लोकसभा सदस्य के रूप में यह चौथी पारी है।

वे राज्यमंत्री के रूप में वित्त और संसदीय मामलों का मंत्रालय संभाल चुके हैं। पटियाला की महारानी परणीत कौर को राज्यमंत्री की शपथ दिलाई जाएगी।

10 जनपथ से रिश्तेआनंद शर्मा संगठन के अहम पदों पर रहे हैं पर वे एक भी चुनाव नहीं जीते। 10 जनपथ में अच्छी पैठ रखते हैं पर जनता के बीच पैठ नहीं बना पाए। चुनाव जीतने के नाम पर वर्ष 1972 में आरपीसीएसडीबी कॉलेज (आरकेएमवी) के अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 1973 में विवि छात्र परिषद, 1975-78 में एनएसयूआई और 1981-84 में भारतीय युवा कांग्रेस के सचिव रहे।



   Bookmark and Share




अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: