480 रुपए के लिए सात साल से जारी है संघर्ष
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480 रुपए के लिए सात साल से जारी है संघर्ष

सीपीब्ल्यूडी के एक सहायक इंजीनियर खुद अपने ही विभाग के खिलाफ सालों से लड़ रहे हैं। सात साल पहले उन्होंने प्लानिंग शाखा के लिए अतिरिक्त काम किया था लेकिन विभाग ने उसका भुगतान नहीं किया। सूचना के अधिकार के तहत जब उन्होंने अपने ही विभाग से जानकारी मांगी कि इस संबंध में क्या नियम हैं तो विभाग ने खुद अपने ही कर्मचारी को जानकारी नहीं दी। मामले में अपील अब सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमिश्नर तक पहुंच चुकी है जिसका जवाब आना अभी बाकी है।...

इंदौर.CPWD सेंट्रल पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट में कार्यरत सहायक इंजीनियर अपने ही विभाग से सात साल पहले किए गए अतिरिक्त काम का अलाउंस मांग रहे हैं लेकिन विभाग है कि देने को राजी नहीं। 480 रुपए की यह राशि ज्यादा नहीं लेकिन इसके लिए संघर्ष करने वाले सहायक इंजीनियर इसे उसूलों की लड़ाई बता रहे हैं।

मामला मार्च 2002 का है। सीपीडब्ल्यूडी के इंदौर कार्यालय में आर.एन. जाट सहायक इंजीनियर के तौर पर फील्ड में कार्यरत थे। इस दौरान उनसे तीन महीने तक फील्ड के अलावा विभाग की प्लानिंग में भी काम करवाया गया। विभाग के नियमानुसार प्लानिंग में काम करने वाले इंजीनियर, सहायक इंजीनियर को 160 रुपए अलाउंस दिया जाता है।

तीन माह तक जाट द्वारा दोनों काम किए गए लेकिन उन्हें कुल 480 रुपए अलाउंस देने से इनकार करते हुए तत्कालीन सुप्रीडेंट इंजीनियर ने तर्क दिया कि वे फील्ड में नियुक्त हैं इसलिए उन्हें यह लेने का हक नहीं है। जबकि आर.एन. जाट का कहना है कि नियमानुसार अलाउंस किसी भी उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसने वह काम किया हो। सात साल पहले उन्होंने जो अतिरिक्त काम किया था उसका भुगतान विभाग को करना चाहिए।

सूचना के अधिकार में नहीं मिली जानकारी

आर. एन. जाट ने सूचना के अधिकार के तहत विभाग से इस संबंध में जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि सीपीडब्ल्यूडी की प्लानिंग शाखा में काम करने के लिए अलाउंस देने का क्या नियम हैं। इसके बावजूद विभाग ने अपने कर्मचारी को अधिकार के तहत कोई जानकारी नहीं दी।

इसके बाद सहायक इंजीनियर ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमिश्नर, नई दिल्ली को अपील की, जिसका जवाब आना बाकी है। वहीं मामले में फैसले के लिए डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेनिंग इन्फॉर्मेशन से दिशा-निर्देश मांगे हैं। इस मामले में इंदौर सीपीडब्ल्यूडी के सुप्रीडेंट इंजीनियर को भी तलब कर लिया गया है और जानकारी ली गई है।

जाट का कहना है कि व्यक्ति की नियुक्ति कहां है इससे अलाउंस मिलने पर कोई फर्क नहीं पड़ता। बात 480 रुपए की नहीं उसूलों की है। जब नियम हैं तो फिर भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा। बस इसी बात को लेकर विभाग से पत्राचार करते और जूझते हुए आज सात साल बीत गए।

अलाउंस भुगतान की बात पर बदल जाते हैं अफसर

सीपीडब्ल्यूडी के प्लानिंग विभाग में आर. एन. जाट सहायक इंजीनियर प्लानिंग के रूप में पदस्थ हैं। विभाग हर मामले में उनकी प्लानिंग को तवज्जो देता है। यहां तक की टेंडर के काम भी उनकी प्लानिंग के अनुसार ही होते हैं। वहीं विभागों में किसी भी संबंध में नियमों की बात आने पर जाट से सलाह ली जाती है। लेकिन जैसे ही उनके अलाउंस भुगतान का मामला आता है तो अफसर बदल जाते हैं और मामला फिर अटक जाता है।

नियम निकालने में हजारों हुए खर्च

सहायक इंजीनियर जाट द्वारा इस संबंध में विभाग के नियम निकालने में अब तक हजारों रुपए खर्च हो चुके हैं। अतिरिक्त काम के अलाउंस भुगतान की नियमावली व किताब खोजने में भी उन्हें काफी समय और पैसे लगाने पड़े लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 480 रुपए लेने की बात नहीं छोड़ी।

हर माह 30 हजार का वेतन

आर.एन. जाट को सहायक इंजीनियर प्लानिंग के रूप में करीब 30 हजार रुपए मासिक वेतन मिल रहा है। जिसमें से कटकर 26 हजार रुपए उन्हें मिलते हैं। ऐसे में अलाउंस राशि उनके लिए छोटी है लेकिन वे इसे अपना हक और कायदे की बात बताते हुए नहीं छोड़ना चाहते।

एक का फैसला दूसरे अफसरों ने दोहराया

पूरे मामले में एक बात भी सामने आई है कि जब-जब इस मामले में सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर से राय मांगी गई तो उन्होंने पुराने सुप्रीडेंट इंजीनियर के फैसले को ही आगे रख दिया। हालांकि इसके पीछे यह मंशा भी बताई जा रही है कि एक अफसर का फैसला दूसरा अफसर बदलना नहीं चाहते।

मैं विभाग के खिलाफ नहीं, नियमों की बात कर रहा हूं

CPWD सीपीडब्ल्यूडी के सहायक इंजीनियर आर. एन. जाट से भास्कर की सीधी बात-

- आप अपने ही विभाग से संघर्ष क्यों कर रहे हैं?

मैं अपने विभाग के खिलाफ नहीं हूं। मैं तो केवल नियमों की बात कर रहा हूं।

- आपके अनुसार प्लानिंग विभाग में अलाउंस देने का नियम क्या है?

विभाग का ही नियम है कि प्लानिंग करने वाले को अलाउंस दिया जाएगा। चाहे वह कहीं भी हो।

- उस समय आपकी पोस्टिंग कहां थी?

उस समय सहायक इंजीनियर के रूप में फील्ड में था।

- अफसरों का कहना है कि आप फील्ड में थे इसलिए अलाउंस नहीं बनता?

मैंने प्लानिंग का काम किया था और संबंधित अलाउंस पोस्ट को नहीं काम को दिया जाता है इसलिए मुझे मिलना चाहिए।

- आखिर विभाग आपकी बात क्यों नहीं मान रहा है?

यही बात जानने के लिए मैंने सूचना के अधिकार के तहत अपने विभाग से जानकारी मांगी थी लेकिन नहीं मिली।

- फिर आपने क्या किया?

इस संबंध में मैंने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमिश्नर को लिखा है। वर्तमान में वहां से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।

अलाउंस पोस्ट पर तैनात सहायक इंजीनियर को दिया जाता है

सीपीडब्ल्यू़डी के सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर राजेंद्र माथुर से भास्कर की सीधी बात-

- आर.एन. जाट को उनका हक क्यों नहीं मिल रहा? उनके अलाउंस का भुगतान क्यों नहीं हो रहा?

नियमानुसार नहीं होने के कारण उनका भुगतान नहीं किया जा सकता।

- उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी लेकिन वह भी उन्हें नहीं दी गई?

हमने इस संबंध में पहले ही उन्हें मौखिक और लिखित तौर पर जानकारी दे दी थी।

- आपके अनुसार आखिर उनका भुगतान बनता है या नहीं?

नहीं बनता।

- क्यों नहीं बनता?

पोस्ट पर बैठे व्यक्ति को ही अलाउंस दिया जाता है। वे उस समय पोस्ट पर नहीं थे। अतिरिक्त प्रभार वाले व्यक्ति को अलाउंस नहीं दिया जा सकता।

- मामले की कमिश्नर में हुई अपील के बाद इस संबंध में आपसे क्या जानकारी मांगी गई थी?

हमने उन्हें विभाग से संबंधित नियम की जानकारी भेज दी गई है।



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