न्यूजीलैंड. एयर न्यूजीलैंड के बोइंग 747-400 विमान को फलों के रस से बनाए गए ईंधन से उड़ाया गया। यह विशेष ईंधन पारंपरिक जेट ईंधन के साथ फलों के रस को मिला कर बनाया गया था। दिसंबर में न्यूजीलैंड में हुए दो घंटे की परीक्षण उड़ान के दौरान यह तथ्य उभर कर सामने आए कि लंबी दूरी के उड़ानों में बायोफ्यूल का प्रयोग कर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 65 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
बच सकता है कार्बन आधारित ईंधन
एयर न्यूजीलैंड के चीफ पायलट डेव मोर्गन के अनुसार 12 घंटों की उड़ान से 1.5 टन ईंधन बचाया जा सकता है और साथ ही (लगभग 60 फीसदी) 5 टन कार्बनडाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत महत्वपूर्ण है लेकिन यह सबकुछ तेल के दाम पर निर्भर करेगा।
कीमत को बनाना होगा प्रतिस्पर्धात्मक
एशिया पैसिफिक एयरलाइंस एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल एंड्रयू हर्डमैन ने कहा कि अभी बायोईंधन परपंरागत ईंधन के कीमत से चुनौती पा रहा है। बायो ईंधन प्रतिस्पर्धी हो सकती है जब कार्बन बेस्ड ईंधन की कीमत में बढ़ोत्तरी हो जाए। उन्होंने साथ ही जोड़ा कि एयर न्यूजीलैंड अपने उड़ान परीक्षण के लिए जैट्रोफा ऑइल का आयात मलावी, मोजाम्बिक, तंजानिया और भारत से करता है।
पर्यावरण संगठनों ने उठाए उपलब्धता पर प्रश्नचिन्ह
कुछ पर्यावरण संरक्षण संगठनों ने जेट्रोफा और अन्य पौधों के उपयोग पर सवाल उठाया है कि यह कहां तक विश्वसनीय है। हर्डमैन ने साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि कई विमानन कंपनियां बायो फ्यूल के विकल्प पर परीक्षण कर रहीं हैं और उन सभी के परिणाम सकारात्मक होते हैं तो बायो फ्यूल की उपलब्धता में संकट का सामना करना पड़ सकता है।
लेकिन अभी यह परीक्षण के दौर में है और अभी बायो फ्यूल के व्यावसायिक उपयोग के पहले इसे कई और परीक्षणों से गुजरना होगा।