धार्मिक फिल्मों का निर्माण भले ही कम होता जा रहा हो लेकिन जब कभी धार्मिक फिल्म प्रदर्शित होती है दर्शक उसे देखने का मौका नहीं गंवाते। ऐसी ही एक फिल्म ‘माय बॉस बजरंगबली’ इस शुक्रवार प्रदर्शित हुई। जेजे श्रीराम इंटरप्राइजेज की इस फिल्म को बच्चों के साथ ही अन्य दर्शकों को भी काफी पसंद किया। निर्देशक हैं कृष्णा वामशी व निर्माता है सुनील प्रकाश वागरेचा।
माय बॉस बजरंगबली कहानी है एक गांव की। गांव वालों की भलाई के लिए सीता माता डेम बना रहे इंजीनियर व उनकी पत्नी की हत्या गांव के कुछ असामाजिक तत्व कर देते हैं। इसमें केवल उनका बेटा अंजी जिंदा बचता है। एक मंदिर के पुजारी की देखरेख में खुद की पहचान से अनजान रहते हुए बड़ा होता है। बजरंगबली को अपना जीवन समर्पित कर देता है।
इन असामाजिक तत्वों का अन्याय गांववासियों पर बढ़ता चला जाता है। उनसे निपटने के लिए अंजी की मदद करने, इंसान के रूप में स्वयं बजरंगबली आते हैं। वे अंजी को उसके जीने का मकसद यानी सीता माता डेम बनाने की याद दिलाते हैं। भोले-भाले अंजी पर पड़ने वाली हर मुसीबत के समय वे अपना चमत्कार दिखाते हैं। अंत में गांव वालों की जीत होती है। फिल्म देखते समय दर्शकों का उत्साह बना रहे इसका विशेष तौर पर ध्यान रखा गया है। स्पेशल इफेक्ट्स ने बजरंगबली को बेहद प्रभावशाली बना दिया। बच्चों और युवाओं के लिए ये चंद घंटे मनोरंजन से भरपूर रहे।