नई दिल्ली. इस साल जुलाई में विस्तारित आम बजट से करीब एक सप्ताह पहले पेट्रोल के दाम दो से तीन रुपए प्रति लीटर बढ़ सकते हैं। अपने पिछले कार्यकाल में केरोसिन और रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल तक में सब्सिडी बांटकर खजाना खाली कर चुकी यूपीए सरकार को ऐसा सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को घाटे से बचाने के लिए करना पड़ेगा। नई सरकार के गठन के बाद पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने मंगलवार को अपने मंत्रालय की पहली समीक्षा बैठक में तेल कंपनियों को भरोसा दिलाया कि उनकी वित्तीय स्थिति खराब नहीं होने दी जाएगी।
दाम बढ़ाना ही विकल्प : मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम एक बार फिर बढ़ना शुरू हो गए हैं। ऐसे में सरकार मूल्य नियंत्रण का अधिकार खत्म करने का जोखिम नहीं ले सकती है। लेकिन उसे पेट्रोलियम कंपनियों को घाटे से बचाने के उपाय भी करने होंगे।
इन परिस्थितियों में सरकार के पास पेट्रोल के दाम बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं है। केंद्र सरकार यह कर सकती है कि पेट्रोल के दाम चार रुपए प्रति लीटर बढ़ाने के बदले दो रुपए का बोझ खुद उठा ले और दो रुपए का बोझ उपभोक्ताओं से उठाने को कहे।
अधिकारियों के अनुसार पिछले साल रिकार्ड बांड जारी कर चुकी सरकार के लिए दो रुपए प्रति लीटर का बोझ भी बहुत भारी पड़ेगा।
आठ जुलाई को रेल बजट!
रेलमंत्री ममता बनर्जी 8 जुलाई को लोकसभा में रेल बजट पेश कर सकती हैं। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि रेल मंत्रालय स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने में व्यस्त है जिसे एक-दो दिन में रेलमंत्री को पेश कर दिया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर रेलमंत्री रेल बजट को अंतिम रूप देंगी।तेल कंपनियों का तर्क 1 जून से पेट्रोल पर साढ़े तीन रुपए लीटर से ज्यादा का नुकसान होना शुरू हो गया है। डीजल पर होने वाला मुनाफा घटकर पचास पैसे रह गया है।
पहले की तरह केरोसिन और रसोई गैस (एलपीजी) पर हो रहा नुकसान भी बढ़ने लगा है। अभी केरोसिन पर प्रति लीटर 12.16 रुपए और रसोई गैस के प्रति सिलेंडर पर 66.86 रुपए का नुकसान हो रहा है।