शिमला. मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने जलविद्युत क्षमता के दोहन पर जनरेशन टैक्स लगाने का मामला केन्द्रीय बजट में शामिल करने का आग्रह किया है। इस बारे में मुख्यमंत्री धूमल केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखा है। धूमल ने कहा है कि प्रणव मुखर्जी ने 1984-85 में जनरेशन टैक्स की परिकल्पना की थी। इसके अलावा 1978 से बिजली पर वसूल किया जा रहा 2 पैसे प्रति यूनिट का टैक्स वापस लेने की बात कही थी।
उस समय मुखर्जी ने जलविद्युत संसाधनों में समृद्ध पहाड़ी राज्यों के ऊर्जा उत्पादन शु:ल्क की मांग का भारतीय संविधान के अनुच्छेद-288‘2’ के तहत समर्थन किया था। धूमल ने केंद्र से मांग की है कि प्रदेश में खनिज संसाधन न के बराबर हैें। केन्द्र से जनरेशन टैक्स मिलने सरकार को सालाना 150 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भेजे गए पत्र में कहा है कि रंगराजन समिति ने भी हिमाचल प्रदेश से सहमति व्यक्त की थी और प्रदेश में उत्पादित जलविद्युत क्षमता पर उत्पादन शुल्क लगाने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा योजना आयोग ने भी इस रिपोर्ट को स्वीकार किया था।
धूमल ने इस बाबत प्रदेश का पक्ष रखते हुए कहा कि हिमाचल में खनिज संसाधन नहीं है जबकि जलविद्युत क्षमता और वन संपदा ही प्रदेश में उपलब्ध मुख्य प्राकृतिक संसाधन है। प्रदेश को 7 सितंबर 1990 के बाद पूरी हुई जलविद्युत परियोजनाओं से 12 फीसदी मुफ्त बिजली मिल रही है।
वित्त मंत्रालय को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस अवधि से पहले निर्मित परियोजनाओं से प्रदेश को कुछ नहीं मिल रहा। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि जनरेशन टैक्स को 12 फीसदी नि:शुल्क ऊर्जा से जोड़ना औेर खनिजों पर रॉयल्टी की दर से इसकी तुलना करना गलत एवं अन्यायपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित जनरेशन टैक्स से प्रदेश को प्राप्त होने वाला राजस्व खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्यों के लिए दी जा रही रॉयल्टी की तुलना में बहुत कम है।
धूमल ने कहा कि हरे वृक्षों के कटान पर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध से प्रदेश को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 1.50 लाख करोड़ की वन संपदा मौजूद है। केन्द्र सरकार ने प्रदेश को कभी भी इस नुकसान की भरपाई नहीं की है। जबकि प्रदेश समूचे उतर भारत का पारिस्थितिकीय संरक्षण दे रहा है। उन्होंने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं में 12 फीसदी नि:शुल्क ऊर्जा की मांग जायज है।