शिमला अगर आप प्रदेश के किसी भी स्थान पर कोई बगीचा या फिर कोई अन्य फसल उगाना चाहते हैं तो कृषि विशेषज्ञों व विभाग की कोई राय लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फसल को उस स्थान पर सफलतापूर्वक उगाने की संभावनाओं और मौसम की परिस्थितियों से संबधित सारी जानकारियां, खेतों के उपजाऊपन से संबधित सारी जानकारी मात्र एक क्लिक पर ही मिल जाएगी।
कृषि विभाग ने एक ऐसी योजना बनाई है जिससे किसानों को उनके खेतों के उपजाऊपन, मिट्टी की गहराई व दूसरी सारी जानकारियां घर बैठे बैठे ही कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन ही मिल जाएगी। कृषि विभाग इस योजना को अगले वर्ष से लागू कर रहा है। विभाग इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए डिजिटल सॉयल फर्टिलिटी मैप तैयार कर रहा है।
देश के केवल गुजरात राज्य में इस किसानों की सहूलियत के लिए इस तकनीक को प्रयोग में लाया जा रहा है। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और कृषि विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक एचआर शर्मा ने इस योजना की पुष्टि करते हुए बताया कि सॉयल हेल्थ कार्ड के मुकाबले में यह तकनीक कई गुणा बेहतर है। इस तकनीक के माध्यम से स्थानीय स्तर के फीचर्स के अलावा उस पूरे एरिया के फीचर्स को भी शामिल किया जा सकता है।
इस तकनीक के प्रयोग से किसान केवल एक क्लिक पर ही एक साथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। संयुक्त निदेशक एचआर शर्मा के अनुसार इस तकनीक में किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की वाटर होल्डिंग कैपेसिटी, क्लाइमेटिक कंडीशन, सयल टैक्सचर जैसी ॉजानकारियां भी प्राप्त होंगी जो सॉयल हेल्थ कार्ड के माध्यम से किसानों को नहीं मिल सकती हैं। उनका मानना है कि प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से थोड़ी दिक्कतें जरूर आ सकती हैं जिसका कारण यह है कि यहां की मिट्टी में काफी विविधता मौजूद है।