इंदौर. शहर में अब भी कुछ सड़कें हैं जो आदर्श कही जा सकती हैं। इन सड़कों पर दोनों हिस्सों में लगे बड़े हरे-भरे पेड़ सुकून दे रहे हैं। यशवंत क्लब के सामने वाली सड़क हो या रेसीडेंसी कैम्पस में ट्रैफिक पार्क के पास वाली रोड। चिड़ियाघर से गोल चौराहे तक के हिस्से में भी दोनों तरफ पेड़ राहत बांट रहे हैं। पर्यावरणविद् कहते हैं इन क्षेत्रों में पेड़ों की संख्या ज्यादा होने के कारण तापमान कम रहता है। ऑक्सीजन ज्यादा मात्रा में मिलती है और एसपीएम कम होता है। कार्बन डाइऑक्साइड सहित अन्य विषाक्त गैस कम मात्रा में बनती हैं। पेड़ों पर पक्षियों का आशियाना होने से प्राकृतिक माहौल भी बना रहता है।
नए रोड के लिए हो नई प्लानिंग
डॉ. व्यास एवं प्रो. आचार्य कहते हैं किसी भी रोड पर ग्रीन बॉक्स विकसित करना मुश्किल नहीं है लेकिन इसके लिए सड़क निर्माण की शुरुआत से पहले ही प्लानिंग की जाना चाहिए। सड़क के दोनों ओर प्लांटेशन के लिए जगह छोड़ने के साथ बारिश के पानी की निकासी होना चाहिए। सड़कों पर नीम, पीपल और बरगद के साथ गुलमोहर और अशोक के पौधे लगा सकते हैं। एक से डेढ़ साल तक के छोटे पौधे आसानी से पनप नहीं सकते, इसलिए पांच से छह साल पुराने पौधे लगाना चाहिए। नए ग्रीन बॉक्स तैयार करने के लिए जगह, समय और सुविधा के मुताबिक पेड़ लगाएं और उन्हें सहेजें। साल भर में ग्रीन बॉक्स आकार लेने लगेंगे।
ग्रीन बाक्स के फायदे ही फायदे
एक पेड एक साल में 260 पाउंड ऑक्सीजन देता है। ग्रीन बाक्स में पेड़ों की संख्या ज्यादा होने से ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मिलती है। 50 मीटर के एरिया में 90 हजार टन सीओटू सालभर में इकट्ठी होती है। ग्रीन बाक्स सीओटू की मात्रा कम कर सकते हैं। 26 हजार मील कार चलने में जितनी सीओटू निकलती है उतना एक पेड़ उसे अवशोषित करता है। ग्रीन बाक्स में लगे पेड़ सीओटू अवशोषित कर सकते हैं।
सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे
प्रदेश विज्ञान सभा द्वारा हाल ही में किए सर्वे में पाया गया कि शहर में मिलावटी पेट्रोल से चल रहे 80 हजार से ज्यादा वाहन जहरीली गैस छोड़ रहे हैं। सर्वे के मुख्य अधिकारी डॉ. के.एस. तिवारी के मुताबिक शहर में लोग 72000 पार्टिकल सांसों के साथ ले रहे हैं। इससे कैंसर व ह्दय रोग हो रहे हैं। साथ ही रक्तदोष हो रहा व लोगों के डीएनए में भी बदलाव होने लगा है। सर्वे की रिपोर्ट राज्य और केंद्र सरकार को भेजी जा रही है। मिक्स ट्रैफिक पर अंकुश के साथ ही धुआं उगलते पुराने वाहनों पर रोक ही इससे बचने का विकल्प है।
ऐसे सहेजें जिंदगी
होलकर साइंस कॉलेज में बॉटनी के प्रो. डॉ. संजय व्यास व पर्यावरणविद् प्रो. सुनील आचार्य ने पूरे शहर को ग्रीन बॉक्स बनाने के उपाय सुझाए
- शहर के 100 से ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित मार्गो का चयन करें अथवा नए विकसित हो रही सड़कों से शुरुआत करें।
- सड़क के दोनों किनारों पर नर्सरी में रखे १क् साल पुराने पौधे लगाएं।
- पौधों का चयन सावधानी से करें और नीम, पीपल व बरगद जैसे जल्दी बढ़ने वाले पौधे लगाएं।
- सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड या अन्य ठोस उपाय करें।
- देखभाल के लिए कर्मचारियों की नियमित ड्यूटी के साथ अलग से बजट तय करें।
- ग्रीन बाक्स को सहेजने या कायम रखने के लिए सोसायटी फोरम बनाने होंगे। इस तरह से अपनी जिम्मेदारियों को खुद ही समझेंगे व सोसायटी में अन्य लोगों को भी प्रेरित करने के लिए पहल कर सकेंगे।
- सरकार की स्पेशल डेस्क भी फोरम से जुड़कर काम करें तो ग्रामीण क्षेत्र में भी बेहतर काम हो सकेगा।
- एक ऐसी कमेटी बने जिससे आईडीए किसी भी विकास के पहले चर्चा करे। यह कमेटी पेड़ों की गिनती कर रिकॉर्ड रखे।
- ग्रीन बाक्स के लिए माली के साथ खाद, दवा, पानी की सुविधा के लिए फंड एकत्र करें और सालभर उसका हिसाब रखें।
यहां हो ग्रीन बॉक्स
नौलखा से नेमावर रोड, आरएनटी मार्ग
शिवाजी वाटिका से पीएससी ऑफिस तक का रोड, महूनाका से फूटी कोठी चौराहा।
एरोड्रम का एक बड़ा हिस्सा।
जीपीओ से रेसीडेंसी होते हुए रेडियो कॉलोनी।
विजयनगर चौराहे से सुखलिया।
विजयनगर चौराहे से रिंगरोड।
शहर के ग्रीन बाक्स
- रेसीडेंसी एरिया (बख्तावरराम नगर से आजाद नगर और स्टेडियम तक)
- अभय प्रशाल व उषाराजे स्टेडियम रोड।
- राजेंद्र नगर।
- रिंग रोड।
- यशवंत क्लब रोड।
