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दिल और दिमाग की नहीं चिंता तो पियो ठंडा
प्रशांत Friday, June 05, 2009 05:50 [IST]  

नई दिल्ली. कोल्ड ड्रिंक में हानिकारक स्तर तक कीटनाशक पाए जाने का विवाद सुस्त पड़ते ही सरकार मानो कोला कंपनियों के आगे झुक गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कोल्ड ड्रिंक में कीटनाशकों के मामले में तय किए गए मानक बेहद कमजोर हैं। पहले तो सरकार ने लेटलतीफी करते हुए मानक बनाने में ही छह साल गुजार दिए, दूसरे, कमजोर मानक तय कर अब वह आम आदमी के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोल्ड ड्रिंक में कीटनाशक की मात्रा नियंत्रित करने के लिए अंतिम उत्पाद का जो मानक तय किया है, वह सरकार के ही दूसरे विभाग भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की तुलना में बेहद कमजोर है। मंत्रालय ने अपने मानक में कोल्ड ड्रिंक (अंतिम उत्पाद) में पाए जाने वाले कुल कीटनाशक की मात्रा 1 पीपीबी (पार्ट्स पर बिलियन) रखी है, लेकिन उसने हर कीटनाशक की अलग मात्रा तय करने जैसी महत्वपूर्ण बात को नजरअंदाज कर दिया है। दूसरी ओर, बीआईएस ने अपने मानक में इसे शामिल किया है। उसने अपने मानक में कोल्ड ड्रिंक में कीटनाशक की अधिकतम मात्रा तो तय की ही है।

हर कीटनाशक की अधिकतम मात्रा भी बताई है। बीआईएस ने कोल्ड ड्रिंक में कुल कीटनाशक की अधिकतम मात्रा 0.0005 मिग्रा प्रति लीटर और प्रत्येक कीटनाशक की अधिकतम मात्रा 0.0001 मिग्रा प्रति लीटर तय की है।

दुनिया में पहली बार

स्वास्थ्य मंत्रालय के कमजोर मानकों पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट (सीएसई) की निदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि अभी तक सरकार मानक तय करने के लिए ही तैयार नहीं थी। यह अच्छी बात है कि पहली बार मानक तय किए जा रहे हैं। ऐसा दुनिया के किसी देश में पहली बार होगा।

अब लागू करें

मानक तय करने के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का कहना है कि समिति ने साफ कहा था कि मानक जल्द से जल्द लागू होने चाहिए। मानक तय होने के बाद अब इन्हें लागू करने में सरकार को देर नहीं करनी चाहिए।



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