भोपाल. देश के वरिष्ठ रंगकर्मी पद्मविभूषण हबीब तनवीर का निधन हो गया। उन्हें पिछले चार दिनों से भोपाल के एक निजी अस्पताल में जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था। उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी। वे फेफड़ों के संक्रमण के अलावा सेप्टीसीमिया से पीड़ित थे। उन्हें तीन सप्ताह पहले भी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिसके बाद उनकी स्थिति सुधर रही थी। लेकिन कुछ दिनों पहले उनकी तबीयत फिर से बिगड़ गई थी।
जन्म छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक सितंबर 1923 को हुआ था। उनके प्रसिद्ध नाटक आगरा बाजार, चरणदास चोर और पोंगा पंडित रंगकर्म की अनमोल धरोहर हंै। वे लेखक के साथ-साथ एक अच्छे निर्देशक भी थे। भोपाल के साथ उनका विशेष लगाव था, उन्होंने 1959 में यहां नया थियेटर नामक नाटच्य समूह शुरू किया था। उन्होंने अपने थियेटर में जमीन से जुड़े कलाकारों को मौका दिया, आज उनके द्वारा लाए गए कलाकार रंगमंच की दुनिया में नामी हस्ती हैं। हबीब साहब के साथ जिसने भी काम किया, उसने हबीब साहब से कुछ न कुछ सीखा ही है। तनवीर साहब को लोगों के प्यार के साथ-साथ कई पुरस्कार भी मिले। उन्हें 1969 में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड इसके साथ ही उन्हें १९९६ में ही संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप भी मिली। 1983 में पद्मश्री और 2002 में पदम विभूषण पुरस्कार से नवाजा गया। इसके साथ ही उन्हें नाटक चरणदास चोर के लिए 1982 में एडिनबर्ग में हुए अंतरराष्ट्रीय ड्रामा फेस्टिवल में फ्रिंग फस्र्ट अवार्ड मिला। वे वर्ष १९७२-१९७८ में राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे।
हबीब साहब ने इन फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।* फुटपाथ (1953)
* राही (1953)
* स्टेइंग ऑन (1980)
* गांधी (1982)
* ये वो मंजिल तो नहीं (1987)
* हीरो हीरालाल (1988)
* प्रहार (1991)
* जिगर (1992)
* द बर्निंग सीजन (1993)
* मेहंदी (1998)
* द राइजिंग : मंगल पांडेय (2005)
* ब्लैक एंड व्हाइट (2008)