- श्रीनाथ की कलम से
मीडिया में धोनी और सहवाग के बीच विवाद की खबर भारतीय किक्रेट टीम के विरुद्ध एक घटिया चाल थी। धोनी और टीम के सदस्यों ने इकट्ठे प्रेस कांफ्रेंस संबोधित कर इस अफवाह को शांत करने का प्रयास किया। आजकल समाचारों की बजाए अफवाह ज्यादा चलती है जिनके कोई सिर पैर नहीं होते। भारतीय टीम एक महत्तवपूर्ण मिशन पर है और कोई भी ऐसी नाकारात्मक टिप्पणी नहीं चाहता।
खिलाड़ियों और संवाददाताओं के हमेशा अच्छे संबंध नहीं रहे। कुछ अच्छे संवाददाता खेल की अच्छाई के लिए लिखते हैं। खिलाड़ियों के विचारों और उनके दृष्टिकोण की सराहना करते है तथा खिलाड़ियों के माइंड फ्रेम को समझने की कोशिश करते हैं और अंत में उनकी खिलाड़ियों से दोस्ती हो जाती है। खिलाड़ी भी एक अच्छे आर्टीकल से प्वांइट निकालने की कोशिश करते हंै और एक छिपी हुई अलोचना या प्रशंसा खिलाड़ी पर जबरदस्त प्रभाव डालती है।
कुछ खिलाड़ी अनुभवी एवं विद्वान लेखकों से प्रेरणा लेते हैं। बहुत से ऐसे धाकड़ और पूर्वाग्रह से रहित रिपोर्ट होते हैं जिनपर खिलाड़ी विश्वास करते हैं ंऔर उनका सम्मान करते है। धोनी और टीम के सदस्यों ने जिस प्रकार रिपोर्ट की निन्दा की, उसपर भी प्रैस के विभिन्न समूहों ने अलग-अलग राय होगी। कुछ ने इसे गैर जरुरतमंद प्रतिक्रिया माना होगा और कुछ ने कहा होगा कि एक मूर्खतापूर्ण बात को अधिक तरजीह दी गई ।
मेरे विचार में टीम की प्रतिक्रिया से मीडिया जगत में यह संदेश पहुंचा होगा कि रिपोर्टिग करते वक्त वे सामूहिक जिम्मेवारी से काम लें। यह समाचार किसी ने अपने कैरियर को चमकाने के लिए प्लांट किया होगा। इससे उसको पब्लिक का ध्यान तो आकर्षित हुआ है परंतु खिलाड़ियों का विश्वास उसने हमेशा के लिए खो दिया है।
टी-20 के बारे में मेरा आंकलन है कि इसमें सभी टीम बराबर हैं। बंगला देश, हालैंड और आयरलैंड जैसी टीमें भी प्रतिष्ठित टीमों के लिए खतरा हो सकती है। हालैंड द्वारा इंग्लैंड को हराना इस का जबरदस्त उदाहरण है। मुझे विश्वास है अगले दो सप्ताह में ऐसे और भी उल्ट फेर होंगे।