मुंबई। वाहन उद्योग को इस बजट से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। राजस्व में कमी के कारण जहां सरकार के कुछ राजकोषीय रियायतें वापस लेने का डर है, वहीं उद्योग इन रियायतों को बनाए रखने के पक्ष में है।
उद्योग को खासतौर से इस बात की आशंका है कि 4 फीसदी सेनवैट घटाने वाली रियायत वापस ली जा सकती है। वाहन उद्योग की बिक्री और मुनाफे में पिछले दिनों काफी सुधार आया है। सेनवैट कमी के बाद कई कार कंपनियों ने कीमतें घटाई थीं और धीमेपन से पहले के दिनों का आभास कराने लगा था। एक प्रमुख कार कंपनी के अधिकारी का कहना था कि वाहन उद्योग में वापसी के अनुमान समय से पहले है। कहां सुधार हो रहा है? मार्च की तिमाही में प्रदर्शन दिसंबर की तिमाही के मुकाबले तो हमेशा ही बेहतर रहता है।
जब तक हर तिमाही में सुधार दिखाई नहीं देता, तब तक हम हालात सुधरने की बात नहीं कर सकते। इनका यह भी मानना है कि हर ब्रांड में डिस्काउंट से भी यह विश्वास पैदा हो गया है कि वाहनों की बिक्री में सुधार आ रहा है।
जनवरी में वाहनों की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 फीसदी कम रही है। फरवरी में बिक्री 15 फीसदी बढ़ी, लेकिन मार्च की बिक्री समान थी। उद्योग का कहना है कि अगर जरा भी लापरवाही की गई तो उद्योग में गिरावट का दौर फिर शुरू हो जाएगा।
उद्योग के सूत्रों के अनुसार जब पिछले साल कमोडिटी की कीमतों में इजाफा शुरू हुआ तब हालात बिगड़ने लगे थे। उसके बाद जून में अलग-अलग उत्पाद शुल्क लगा दिया गया। सितंबर में अंतरराष्ट्रीय मंदी शुरू हो गई। 2008-09 की पहली छमाही में उद्योग में 6 फीसदी की प्रगति हुई, लेकिन तीसरी तिमाही में यह 21 फीसदी कम हुआ। चौथी तिमाही में जरूर हालात सुधरे।
उद्योग के ज्यादातर लोग नीति को बरकरार रखने के पक्ष में हैं। यही स्थिति शुल्क और टैक्स में बनी रहेगी। अलग-अलग उत्पाद शुल्क और छोटी बनाम बड़ी कार का मसला फिर उठने की पूरी उम्मीद है।