नई दिल्ली। आयातित कार और एसयूवी गाड़ियों के टायरों पर सेफगार्ड ड्यूटी लगाने की टायर निर्माताओं की गुजारिश पर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सेफगार्ड ड्यूटी (डीजीएसडी) ने जांच शुरू कर दी है। लेकिन इसका विरोध कर रहे टायर डीलर संघ ने डीजीएसडी को ज्ञापन देकर टायर निर्माताओं के संगठन द्वारा दिए गए आंकड़ों पर सवाल किया है और मांग की है कि कोई फैसला करने से पहले उनका भी पक्ष सुना जाए। टायर डीलरों की परेशानी इस बात से है कि अगर आयातित टायर पर ड्यूटी लगने पर उनका कारोबार प्रभावित होगा। अभी उन्हें घरेलू टायर के मुकाबले आयातित टायरों पर ज्यादा मुनाफा मिलता है। ड्यूटी लगने पर उनका मुनाफा घट सकता है।
डीजीएसडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (एटमा) ने हमें एक पत्र भेजा है जिसमें चीन से आयात होने वाले कार के टायरों से घरेलू निर्माताओं को नुकसान पहुंचने का जिक्र किया गया है। डीजीएसडी ने एटमा की शिकायत पर 18 मई को जांच शुरू कर दी है।
लेकिन डीजीएसडीके इस कदम का टायर डीलर विरोध कर रहे हैं। ऑल इंडिया टायर डीलर फेडरेशन के संयोजक एस.पी. सिंह ने बिजनेस भास्कर को बताया कि सरकार ने पहले वर्ष 2007 में आयात होने वाले नायलॉन टायर पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई। फिर 24 नवंबर 2008 को व्यावसायिक वाहनों के रेडियल टायरों के आयात को भी सीमित कर दिया गया।