नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अगले 100 दिनों के एजेंडा को कमोबेश तैयार कर लिया है और वाणिज्य व उद्योग मंत्री के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। इस एजेंडा में देश के निर्यात क्षेत्र को राहत दिलाना शीर्ष पर है। वाणिज्य मंत्रालय वैश्विक मंदी से सर्वाधिक प्रभावित इस क्षेत्र को अगले 100 दिनों के भीतर ही बजट के माध्यम से यह रियायतें देगा।
सूत्रों के मुताबिक निर्यातकों को ऋण सीमा बढ़ाने से लेकर, एफबीटी से राहत, ब्याज दरों में कमी, ब्याज माफी (इंटरेस्ट सबवेंशन) की अवधि को बढ़ाये जाने, डीईपीबी दरों में बढ़ोतरी और भारतीय निर्यात के लिए विदेशों में नए बाजार खोलने में सहयोग देने से सीधा बावस्ता होगा। सरकार ने जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय फोरम का भी सहयोग लेगी।
इस मामले में सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि बजट पेश करने के एक महीने के भीतर ही अगले पांच वर्षो के लिए विदेश व्यापार नीति की घोषणा की जाएगी जिसमें निर्यात क्षेत्र के लिए और व्यापक राहत का ऐलान किया जा सकता है। सरकार की कोशिश वैसे क्षेत्रों, खासकर, छोटे एवं मझोले उद्यमियों से संबंधित क्षेत्रों को सबसे पहले और क्षेत्रवार तरीके से सहायता पहुंचाने की है, जो वैश्विक मंदी से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। इनमें गारमेंट, लेदर, हाउसिंग, वाणिज्यिक वाहन जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के लिए प्राथमिकता की सूची में दूसरा स्थान मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने से संबंधित है। इस क्षेत्र के लिए भी अगले 100 दिनों के भीतर काफी कुछ किया जाएगा । एक व्यापक मैन्युफैक्चरिंग नीति बनाने के बारे में भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसी प्रकार वाणिज्य मंत्रालय ने अगले 100 दिनों में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से संबंधित मौजूदा नियमों में ज्यादा फेरबदल किए जाने का मन नहीं बनाया है।
पर प्रेस नोट 2 और 3 को लेकर स्पष्टीकरण देने और आवश्यकता पड़ने पर उसमें जरूरी संशोधन की संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता। सरकार अगले 100 दिनों में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के विकास के लिए काफी कुछ करने के मूड में है। सरकार की कोशिश इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं की राह में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने और उनके लिए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक व्यय की व्यवस्था करने की है। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि कृषि और औद्योगिक कमोडिटीज की कीमतों के साथ साथ मुद्रास्फीति दर को निम्न बनाये रखने का भी प्रयत्न किया जाएगा। अगले 100 दिनों के भीतर सरकार, खासकर, वाणिज्य मंत्रालय न केवल आसियान देशों के साथ बल्कि दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) को भी अंजाम देने की कोशिश करेगी।