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Personal Finance Personal Finance मुंबई। नए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने एक बार फिर भारत की खोज कर ली है। लेहमैन ब्रदर्स के बाद की दुनिया में भारत निवेश के पसंदीदा केंद्र के रूप में उभर रहा है। भारत में हर सप्ताह आने वाले विदेशी धन और इंडेक्स में बढ़त इसकी पुष्टि करते हैं। कुछ बदलाव ऐसे हैं, जो साफ तौर पर नहीं दिखाई देते। चीन और मध्य एशिया के फंड ज्यादा सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। बाजार के सूत्रों का कहना है कि मध्य एशिया के एक बड़े फंड ने चुनाव नतीजे आने के पहले करीब एक अरब डॉलर का निवेश किया था।
मध्य पूर्व के देशों में संयुक्त अरब अमीरात के सबसे ज्यादा पंजीकृत एफआईआई हैं, जिनकी संख्या 15 है। ओमान से छह, कुवैत से तीन और कतर व सऊदी अरब से दो-दो एफआईआई पंजीकृत हैं। अभी सेबी में करीब 1,659 एफआईआई पंजीक़त हैं और अमेरिका के 566 एफआईआई हैं। ब्रिटेन 266 संस्थाओं के साथ दूसरे क्रम पर है। लक्जमबर्ग 106 संस्थाएं पंजीकरण करा चुका है। विशेषज्ञों की राय में इन संस्थाओं के निवेश करने के तरीके में काफी बदलाव आ चुका है।
जोखिम शब्द के स्थान पर रिटर्न आ रहा है। जेएम फिनांशियल म्यूचुअल फंड के डिप्टी सीईओ भानु कटोच का कहना है कि परिवर्तन साफ दिखाई दे रहा है। भारत में दिलचस्पी लेने वाले लोगों की भाषा में अंतर आया है। अब वे रिस्क प्रीमियम की बात नहीं कर रहे हैं। रिटर्न प्रीमियम की बात हो रही है। अमेरिका और यूरोप के बाजार में कोई रिटर्न नहीं है, भारत ही है जहां रिटर्न की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
डॉलर की तरफ से बढ़ते जोखिम के कारण भी ये विदेशी निवेशक अपने पोर्टफोलियो का जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में जो धन भारत आया है उसका बड़ा हिस्सा लंबी अवधि के लिए दिखाई देता है। एसवीएस सिक्यूरिटीज के हरीश वासुदेवन का कहना है कि चीन और मध्य पूर्व के देशों से लंबी अवधि का निवेश आ रहा है, वे भारत में अपना पोर्टफोलियो बना रहे हैं। यह धन तेजी से बाहर नहीं निकलेगा।