सुहावने घाट..कलकल करती नदियां..ढलता सूरज और हरी-भरी वादियों में पक्षियों के कलरव और ठंडी बयार का मजा लेने के लिए अभी भी प्लानिंग की जा सकती है। मध्य प्रदेश में कुछ ऐसे स्पॉट हैं जहां छुट्टी का लुत्फ लिया जा सकता है।
मांडव
मांडव रानी रूपमती के प्रेम की कहानी के लिए ख्यात है। यहां के मसजिद व मकबरे इतिहास को बयां करते हैं। मांडू अतीत की सुनहरी यादें संजोए हुए है। वैकेशन के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां जहाज महल, हिंडोलामहल के अलावा घूमने के लिए कई आकर्षक जगह हैं। मांडू से लगी हुई वैली है जहां सात सौ सीढ़ियां बनी हुई हैं, जो विचित्र कलाकारी का नमूना है। बूढ़ी मांडव में असंख्य मूर्तियों का सौंदर्य देखने लायक है। इसके अलावा मालीपुरा डेम भी घूमने के लिहाज से अच्छी जगह है। हफ्तेभर का टूर यहां के घूमने के लिए काफी है। मांडू के बारे में सबसे अनोखी बात यहां की खुरासानी इमली है। यहां आज भी इमली के दुर्लभ पेड़ मौजूद हैं। पुराने समय में अरब देशों से आए लोग अपने साथ विशेष प्रकार की इमली लेकर आते थे, जो पानी की कमी को पूरा करती थी।
कान्हा
जंगलों के झुरमुट, झाड़ियों की ओट और गुंथे वृक्षों से सजा कान्हा। इसे 1955 में राष्ट्रीय अभयारण्य घोषित किया गया। 1973 में बाघ परियोजना में शामिल कर इसका क्षेत्र 940 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया। कान्हा में पठार, घाटी व वनों का मिलाजुला चरागाह शामिल है। सड़क मार्ग से जबलपुर से ज्यादा दूर नहीं है। सुंदर वन प्रांत में जानवरों व परिंदो की बहुतायत है। पक्षियों का कलरव और हरियाली देखने लायक है। कम समय में कान्हा की सैर कर जंगल और वन्य प्राणियों को देख सकते हैं।

पचमढ़ी
म.प्र. का एकमात्र हिल स्टेशन है पचमढ़ी। इस हिल स्टेशन जाने के लिए बस व रेल मार्ग है। रेल मार्ग के लिए निकट स्टेशन पिपरिया जाना पड़ता है। हरी-भरी वादियां खुद में समेटे पचमढ़ी, घूमने के लिए यह सही समय है। यहां के सदाबहार साल वन, प्राकृतिक आम्रकुंज एक और बायीं तरफ गहरी घाटी तो दूसरी तरफ ऊंची महादेव पर्वत श्रंखला को देखना इस वैकेशन में अच्छा अनुभव हो सकता है।
बांधवगढ़
संसार को सबसे पहला सफेद शेर देने वाला बांधवगढ़ इंदौर से करीब 651 किलोमीटर है। यहां ताला में ठहरने की व्यवस्था है। मप्र पर्यटन विकास निगम का व्हाइट टाइगर लॉज भी है। 32 पहाडियों से घिरा बांधवगढ़ व बीच में हरी-भरी वादियां व घास के मैदान बिखरे पड़े हैं।

ओंकारेश्वर
खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर शिव के 12 ज्योतिर्लिगों में से एक तीर्थ स्थल है। ओंकारेश्वर में काजल रानी गुफा, सिद्धांत टेंपल, २४ अवतार, सत्मतरिका टेंपल जैसे कई मनोरम स्थल हैं। नर्मदा और कावेरी की अनुपम छटा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। संगम स्थल पर जाकर नदियों का मनोहर रूप देखने लायक है।
महेश्वर
नर्मदा नदी के तट पर बसे महेश्वर का इतिहास काफी पुराना है। यहां रामायण तथा महाभारतकाल क ी मनोरम कलाकृतियों का भंडार है। भगवान शिव के आकर्षक मदिर हैं। कुछ दूर स्थित सहस्त्रधारा का सौंदर्य देखने लायक है। गर्मी में भी यहां जा सकते हैं। यहां के घाट की सुंदरता और शांत माहौल सभी का मन मोह लेता है।
दूधिया बावड़ी
सिमरोल रोड होते हुए कजलीगढ़ पहुंचकर दक्षिणी दरवाजे से होकर यहां जा सकते हैं। इस दरवाजे को पार करते ही एक लंबी घाटी नजर आती है। बरसात में कई झरने यहां दिखते हैं। कजलीगढ़ के बाद पैदल जाना पड़ता है।
नर्मदा प्रोजेक्ट
एक दिन घूमने के लिहाज से नर्मदा प्रोजेक्ट सबसे बेहतर है। यहां जाकर नर्मदा के टनल्स देखने का अपना मजा है। ये टनल जलूद से शुरू होकर बड़गोंदा होकर महू-मंडलेश्वर मार्ग पर निर्माणाधीन है।
कांछला फाल्स
चोरल, तिंछा फाल और रालामंडल को छोड़ सिमरोल रोड पर कांछला फाल्स भी है। खंडवा रोड स्थित डाक बंगले के पास बने पुल से रास्ता है। कांछला के रोड पर बने ढाबे तक गाड़ियों से जा सकते हैं। कुछ दूर पैदल चलने के बाद 10-15 फाल्स नजर आते हैं।