नई दिल्ली । देश के प्राकृतिक गैस उत्पादन क्षेत्र को चिर प्रतीक्षित आयकर छूट जल्द ही मिल सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार के एजेंडे में प्राकृतिक गैस उत्पादन क्षेत्र को कर छूट देने का मामला शीर्ष वरीयता में है। बजट में या उससे पहले भी इस बारे में घोषणा हो सकती है।
सूत्रों ने बताया कि देश के तेल व गैस उत्खनन क्षेत्र में खासकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बेहद जरूरी है कि इस क्षेत्र को भी तेल उत्खनन की ही तरह टैक्स छूट का लाभ दिया जाए।
नई सरकार के गठन के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने 100 दिनों के एजेंडा में भी इस मुद्दे को अपनी प्राथमिकता सूची में रखा और वित्त मंत्रालय समेत सभी संबद्ध विभागों से बातचीत की। सूत्रों ने बताया कि अब जल्द ही इस बारे में फैसला हो जाने की संभावना है।
खास बात यह है कि प्राकृतिक गैस के वाणिज्यिक उत्पादन को कर छूट देने के मामले के समाधान के बाद ही नई उत्खनन एवं लाइसेंसिंग नीति (नेल्प) के आठवें दौर के लिए रोड शो शुरू हो पाएगा।
पिछले महीने से इसी वजह से मंत्रालय को इस दौर के लिए रोड शो को स्थगित कर देना पड़ा था। यही कारण है कि पेट्रोलियम मंत्रालय इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभ में वित्त मंत्रालय ने प्राकृतिक गैस के वाणिज्यिक उत्पादन को कर छूट देने से होने वाले राजस्व नुकसान को देखते हुए इसे हरी झंडी देने से इंकार किया।
लेकिन सूत्रों के अनुसार, अब वित्त मंत्रालय इस पर सहमत हो गया है और हो सकता है कि जल्द ही इसे कर छूट दिए जाने की घोषणा कर दी जाए। बताया जाता है कि इस क्षेत्र को कर छूट दिए जाने से सरकारी खजाने को 40 हजार करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान हो सकता है।
आयकर अधिनियम , 1961 के सेक्शन 80 1बी (9) के प्रावधानों के अनुसार, मिनरल आयल उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्रारंभिक वर्ष समेत लगातार सात आकलन वर्षो के लिए 100 फीसदी कर छूट दिया जाएगा।
वित्त वर्ष 2008-09 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मिनलर आयल की परिभाषा को कच्चे तेल तक सीमित कर दिया जिसमें प्राकृतिक गैस का उत्खनन शामिल नहीं था। पेट्रोलियम क्षेत्र को प्राकृतिक गैस उत्खनन के इस परिभाषा से बाहर किया जाना नागवार गुजरा।
क्योंकि उत्खनन संचालन में समूचा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र शामिल होता है न कि केवल तेल या गैस।
यह कर छूट भारत में उत्खनन क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन था और अब इसके वापस लिए जाने से अंतरराष्ट्रीय निवेशक ठगा सा महसूस कर रहे हैं। भारत ने नेल्प के आठवें दौर के लिए गहरे समुद्र के 24 ब्लाक, छिछले समुद्र के 28 ब्लाक और 18 आनलैंड ब्लाक की पेशकश की है।
अनुमान है कि इनमें 3 अरब डालर से भी अधिक का निवेश होगा। नेल्प-8 के लिए बोली के प्रतिवेदन की आखिरी तारीख 20 अगस्त है। इसलिए भी जरूरी है कि प्राकृतिक गैस उत्खनन क्षेत्र को कर छूट दिए जाने पर फैसला ही कर लिया जाए जिससे इस क्षेत्र में अपेक्षित निवेश हो सके।