मुंबई। मेडिक्लेम पालिसी के तहत दावों के भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। इस काम को कुछ महीनों में ही अंजाम दिया जाएगा। राष्ट्रीय बीमा कंपनियां 85 फीसदी ऐसी पालिसियों का काम देखती हैं। अब ये कंपनियां योजना बना रही हैं कि बैंकों के जरिए केंद्रीयकृत भुगतान योजना बनाई जाए।
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के सीएमडी जी श्रीनिवासन का कहना है कि कंपनी ने अब भुगतान टीपीए के जरिए करने के बजाय बैंकों के जरिए करना शुरू कर दिया है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कंपनी एकल खिड़की योजना का सहारा लेने वाली है।
इस क्षेत्र में महारत रखने वाली बैंकों से करार किए जा रहे हैं। नेशनल इंश्योरेंस के अधिकारी का कहना है कि नए सिस्टम में निर्धारित बैंक में सभी टीपीए के खाते होंगे। जितने भी दावों को क्लीयरेंस मिल जाएगा, उन्हें बैंक खातों में अपलोड कर दिया जाएगा।
बैंक दावा क्षतिपूर्ति चाहने वाले को एक डिमांड ड्राफ्ट जारी कर देगा। अगले कुछ महीनों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। बीमा कंपनी बैंक में अपना कुछ धन रखेगी और दावों के भुगतान में विलंब की समस्या को हल कर लेगी।
अब तक दावों के भुगतान में विलंब की जिम्मेदारी टीपीए, अस्पतालों और बीमा कंपनियों पर डाली जाती रही है। अस्पतालों का कहना है कि टीपीए समय पर भुगतान नहीं करते, टीपीए का कहना है कि धन की उपलब्धता नहीं रहती।
न्यूइंडिया एश्योरेंस और ओरिएंटल इंश्योरेंस जैसी कंपनियों का कहना है कि नई प्रणाली का आकलन किया जा रहा है।
सरकारी बीमा कंपनियों का एक टीपीए?
चार सरकारी कंपनियों न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंश्योरेंस के बारे में संभावना है कि बराबर हिस्सेदारी से एक कंपनी बनाई जाएगी जिसे टीपीए बनाया जाएगा। अभी हर कंपनी के करीब 10-12 टीपीए हैं। एनएआईसी के ही करीब 21 टीपीए हैं।