आजकल लोगों की दिनचर्या ही नहीं, बल्कि खान-पान और रहन-सहन का तरीका भी बदल गया है। अनियमित जीवन के कारण तमाम बीमारियां सामने आ रही हैं, तो इलाज भी काफी महंगा हो गया है। ऐसे में आयुर्वेद रोगों का समूल नाश करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
इसकी दवाएं प्रभावी और सस्ती हैं। इस आलेख के माध्यम से आयुर्वेद की कुछ ऐसी दवाओं के बारे में बताया जा रहा है, जो शरीर को निरोगी रखने में मददगार हैं। यदि इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल में लाया जाए, तो निश्चित रूप से शरीर को पुष्ट और बलशाली बनाया जा सकता है।
प्रथम उपाय
भृंगराज और काला तिल 25-25 ग्राम तथा सूखा आंवला 12 ग्राम लेकर उसका बारीक चूर्ण बनाएं। फिर उसमें 50 ग्राम शक्कर मिलाएं, सभी को मिलाकर एक बार फिर चूर्ण बना लें और सुबह-शाम 5 ग्राम चूर्ण पानी में मिलाकर लेने से छोटी उमर में होने वाले सफेद बाल काले हो जाते हैं।
बालों का झड़ना रुक जाता है, आंखों तथा शरीर की गरमी दूर होती है। लगातार एक या दो वर्ष तक लेने से बहरापन खत्म हो जाता है, साथ ही आंखों का तेज बढ़ता है।
द्वितीय उपाय
पीपल के फल को सुखाकर, उसकी ऊपरी छाल का बारीक चूर्ण बना लें। रोज दस ग्राम चूर्ण गाय के दूध के साथ सुबह-शाम तीन से छह महीने तक लेने से हृदय रोग, एसिडिटी, रक्त प्रदर खत्म होता है। इसके साथ ही सात्विक भोजन लेना चाहिए।
तृतीय विधि
अच्छी क्वालिटी का गेहूं 50 ग्राम, नई मेथी 5 ग्राम, साबूत हल्दी 5 ग्राम तथा सूखे साबूत आंवले 10 ग्राम, इन सभी को एक कांच या मिट्टी के पात्र में रखकर उसे दो-तीन बार पानी से धो लें। 300 ग्राम पानी मिलाकर उसे 24 घंटे के लिए रख दंे।
इसके बाद इसे हाथ से अच्छी तरह से मसल दें। कपड़े से छान लें, फिर पानी को सुबह के वक्त खाली पेट लें। इस दवाई में 300 ग्राम पानी मिलाकर दूसरे दिन भी इसी तरह ग्रहण करें। तीसरी बार उक्त सारी चीजें नए सिरे से लें।
लगातार तीन माह तक इसका प्रयोग करने से आलस्य और स्फूर्ति का अभाव दूर होता है। शरीर में नई शक्ति का प्रवाह होता है। स्वास्थ्य सुधरता है। आंख तथा चेहरे की चमक बढ़ती है और वृद्धावस्था के लक्षण दूर हो जाते हैं।
चतुर्थ प्रयोग
मेथी 100 ग्राम, काला जीरा 50 ग्राम, अजवाइन, हल्दी, गिलोय नाम की एक बेल, हरडा, गोखरु, आंवला, बायबिडंग, अजरुन छाल और काली मिर्च को दस-दस ग्राम की मात्रा में लेकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को रोज सुबह-शाम एक चम्मच (करीब 5 ग्राम) कुनकुने पानी के साथ लगातार एक से तीन माह तक लें।
इसके सेवन से मधुमेह, एसिडिटी, जोड़ों का दर्द, ब्लडप्रेशर, किडनी का दर्द, सफेद दाग, मोटापा, पेट दर्द, रक्त विकार, आलस्य, स्फूर्ति का अभाव, शरीर टूटना, बुखार आदि अनेक पीड़ाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। हालांकि व्यायाम तो एक जरिया है ही शरीर को स्वस्थ रखने का।