
तकनीक के बल पर न सिर्फ़ हमारी दुनिया बदल रही है, बल्कि एक नई दुनिया भी बन चुकी है। तेज़ी से लोकप्रिय हो रहीं सोशल नेटवर्किग साइट्स की अच्छाइयां हैं, तो इनके नकारात्मक पहलू भी हैं। इस वर्चुअल वर्ल्ड में भी सतर्क रहने की ज़रूरत है..
यह वर्चुअल युग है। दोस्तों के मिलने-जुलने की जगह अब बग़ीचे और कै फ़े से बदलकर फे सबुक, माइस्पेस, ट्वीटर और ऑरकुट जैसी सोशल नेटवर्किग साइट्स बन गई हैं। यहां आप वही हैं, जो आप होना चाहते हैं और यहां आपकी ज़रूरतें कई गुना तेज़ गति से पूरी हो सकती हैं। यहां दोस्ती और संबंधों की नई परिभाषाएं हैं। हम एक क्लिक के साथ एक ऐसे माध्यम पर होते हैं, जो भौगोलिक, राजनैतिक और सामाजिक सीमाओं के परे है।
आज का युवा सोशल नेटवर्किग साइट्स के ज़रिए दुनियाभर में फैले समान विचार और रुचि वाले लोगों से अपने संबंध बना रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसमें उम्रदराज लोगों या बच्चों की उपस्थिति कम है। इस नए वचरुअल वल्र्ड में हर वर्ग की ज़रूरतें पूरी करने की असाधारण क्षमता है। नेटवर्किग साइट्स को लोगों ने जिस तरह हाथो-हाथ लिया है, उसके पीछे तकनीक की बड़ी भूमिका है।
संचार क्रांति के साथ एक ओर जहां दुनिया छोटी हुई है, वहीं लोगों की दृष्टि भी व्यापक हुई है। युवा वर्ग इन बदलावों से बहुत प्रभावित है। ऐसे में सोशल नेटवर्किं ग साइट्स युवाओं को नए दोस्त बनाने में मदद करती हैं। आम जिंदगी में आप क्या हैं, कैसे हैं, कहां रहते हैं जैसे कई तथ्य सबके सामने होते हैं। यह हक़ीक़त दोस्ती के दायरे को सीमित करने वाली होती है। वचरुअल दुनिया के नियम जुदा हैं। यहां आप वही होते हैं, जो आप होना चाहते हैं।
यानी सेल्फ ब्रांडिंग का नायाब नमूना। यहां प्रोफाइल ही आपका परिचय होती है, जो आपकी गतिविधियों से लगातार बदलती रहती है। किस तरह के लोग आप के बढ़ाए दोस्ती के हाथ को थामेंगे, यह आपकी प्रोफाइल पर निर्भर करता है। ऐसा नहीं है कि ये साइट्स आम लोगों की कल्पना को ही उड़ान दे रही हैं। कई जानी-मानी हस्तियां यहां लोगों से मिलती-जुलती हैं और विचारों का आदान-प्रदान करती हैं। मसलन, फेसबुक पर आप अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, पोप बेनिडिक्ट, फु टबाल खिलाड़ी डेविड बेकहम, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, मशहूर गायिका मैडोना, जाने-माने अभिनेता अल पचीनो और अभिनेत्री ऐश्वर्या राय से भी मिल सकते हैं।
हाजिर हैं हजारों हजार विषय : दोस्त की ज़रूरत हर किसी को होती है। कभी अपनी ज़िंदगी के अच्छे-बुरे लम्हों को बांटने के लिए, तो कभी सपोर्ट के लिए। लेकिन तेज ऱफ्तार ज़िंदगी के प्रेशर और डिमांड के चलते यार-दोस्तों के लिए समय, जगह और मौक़े कम होते जा रहे हैं। ऐसे में नेटवर्क साइट्स ने इसकी भरपाई का प्रयास किया है। लेकिन इस नई वचरुअल दुनिया ने दोस्ती के मायने, तरीक़े और अपेक्षाओं को भी बदल दिया है।
सोशल नेटवर्किग साइट्स के माध्यम से लोग दोस्तों और समूहों के नेटवर्क का इस्तेमाल नए दोस्त और समान रुचि रखने वालों से मिलने में करते हैं। यहां आप पुराने दोस्तों से फिर संपर्क कर सकते हैं। नई कम्युनिटी या फोरम में अपने मनपसंद विषय पर अपनी राय रख सकते हैं व दूसरों के विचार जान सकते हैं। नेटवर्किं ग साइट्स कई अन्य फीचर भी उपलब्ध करवाती हैं, जिनमें म्यूज़िक, वीडियो, फोटो शेयरिंग आदि शामिल हैं।
हर वह विषय, जिसे आदमी सोचता है, एक कम्युनिटी में तब्दील हो जाता है। अपने हर ख्याल पर हज़ारों लोगों के विचार जानना हमंे न सिर्फ सुकून देता है, बल्कि उस विषय के कई नए पहलुओं से वाकिफ भी कराता है। इसने लोगों को अभिव्यक्ति का एक माध्यम तो दिया ही है, लोकतंत्र की नई परिभाषा भी गढ़ी है।
नौकरी में मददगार : दोस्ती-यारी और मनोरंजन के साथ ही सोशल नेटवर्किग तेज़ी से प्रतिभाओं की खोज का माध्यम बनकर उभरी है। मुंबई में एक टेक्निकल कंसलटेंसी में कार्यरत अलंकार बताते हैं कि सोशल नेटवर्किग साइट्स पर कई कम्युनिटीज़ नौकरी की तलाश करने वाले प्रोफेशनल और उनके भावी नियोक्ताओं को एक साथ मिलाती हैं। एक फ़ायदा यह होता है कि यहां प्रोफेशनल अपने रेफरेंस भी देते हैं। यह ऑनलाइन सुविधा संस्थान और प्रोफेशनल, दोनों के लिए एक मुनाफे का सौदा है।
यहां समय और लागत दोनों स्तर पर काफी बचत होती है। इंदौर में एमबीए के छात्र अमी फेसबुक और ऑरकुट के नियमित यूजर हैं। वे बताते हैं, ‘नेटवर्क साइट्स यार-दोस्तों से संपर्क में रखती हैं। यहां वीडियो, फोटो और हॉबीज़ जैसे म्यूज़िक आदि को शेयर करना बहुत आसान है। सीधे अपने पसंदीदा म्यूज़िक या कलाकार की कम्युनिटी ज्वाइन करो और मनचाही चीज़ें पाओ। ये प्रोफेशनल जीवन में हो रहे नए बदलाव और जॉब सर्च में भी मदद करती हैं। यहां फन और नॉलेज दोनों का साथ है।’
ओशो टाइम्स की संपादक मां अमृत साधना फेसबुक, ट्वीटर की रेगुलर यूजर हैं। उनका मानना है कि सोशल नेटवर्किग से आदमी की चेतना विस्तृत हुई है। सुबह कैलिफोर्निया की कोई मित्र जॉगिंग का अनुभव बताती है या इजरायल से कोई मित्र देर से उठने के लिए बीती रात की पार्टी के अनुभव सुनाता है, तब लगता है मानो सारा संसार एक परिवार ही तो है। लेकिन यह भी सच है कि यह सब बहुत उथले स्तर पर ही होता है। यहां की दोस्ती शाब्दिक ही होती है और यह विरोधाभास है कि इतने सारे दोस्तों से निरंतर घिरे रहने के बावजूद आदमी बहुत अकेला और बेचैन महसूस करता है। यहां ख़ुद को स्वस्थ रखने के लिए अध्यात्म के धरातल को छूने की ज़रूरत है।
सतर्कता और समझदारी भी ज़रूरी : विशेषज्ञ भी इन साइट्स के उपयोग को लेकर चेतावनी देते हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल दिल्ली के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक समीर पारिख कहते हैं, ‘इन साइट्स पर समय गुज़ारने के सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों पहलू हैं। यदि उपयोग समझदारी के साथ न किया जाए, तो नतीजे बुरे होते हैं, ख़ासकर तब जब इसका आकर्षण आम जीवन को प्रभावित करने लगे।’
महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में मनोरोग विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आर.एन. साहू बताते हैं, ‘कंडक्ट डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों के लिए ऐसी साइट्स काफ़ी नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। कई ऐसे लोग हमारे पास आते हैं जिन्हें इन साइट्स की लत लग जाती है और उनका घर-परिवार इससे प्रभावित होता है।’
इंटरनेट को मिल रहे नए आयाम : इन सबके बावजूद सोशल नेटवर्किंग साइट्स की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है। इनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले फेसबुक पर 20 करोड़ यूजर्स दर्ज हैं और इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या रोज़ाना बढ़ रही है। सिर्फ़ दिसंबर 2008 में इस पर छह लाख नए यूजर्स आए थे, जो एक रिकॉर्ड है। इन साइट्स पर लोगों द्वारा बिताया जाने वाला समय भी बढ़ रहा है।
रिसर्च एजेंसी नीलसन के अध्ययन में सामने आया है कि फेसबुक के यूजर्स द्वारा समय बिताने का आंकड़ा 2009 में 700 फ़ीसदी बढ़ा है। अप्रैल 2008 में फेसबुक के यूजर्स ने 1.7 अरब मिनट साइट पर बिताए थे, जो अप्रैल 2009 में बढ़ कर 13.9 अरब मिनट हो गए। यानी लोगों के विचार और कल्पनाओं के अनुरूप ढलती सोशल साइट्स इंटरनेट दुनिया को नए आयाम दे रही है। अब व्यावसायिक संगठन भी लोगों की इस ऑनलाइन दुनिया के अनुसार अपनी योजनाएं बनाने मे जुट गए हैं। नेटकवर्किग जगत के ज्यादातर जानकारों का मानना है कि वह समय दूर नहीं, जब इंटरनेट का उपयोग करने वाला हर आदमी नेटवर्कि ग साइट्स पर अपनी ज़िंदगी की दूसरी पारी खेल रहा होगा।
टॉप टेन सोशल नेटवर्किग साइट्स
* फेसबुक
* माइस्पेस
* बेबो
* फ्रेंडस्टर
* एचआई5
* ऑरकुट
* पर्फसा़फ्ट
* याहू360
* झोर्पिया
* नेटलॉग