दो नए अध्ययन बताते हैं कि शादी के बाद नींद में सुधार आता है और अच्छी नींद से दांपत्य में प्रगाढ़ता आती है। इस अध्ययन से पता चला है कि शादीशुदा महिलाएं, उन महिलाओं की तुलना में बेहतर नींद लेती हैं, जिनकी शादी नहीं हुई है।
यही नहीं, खुशहाल दांपत्य से नींद संबंधी समस्याओं में भी कमी आती है, जबकि दांपत्य में तनाव से नींद से जुड़ी समस्याएं सिर उठाने लगती हैं।
इस निष्कर्ष के अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन ने शादी से जुड़े एक नए ‘न्यूलीवेड’ प्रभाव को खोज निकाला है। यह बताता है कि अध्ययन के दौरान जिन महिलाओं की शादी नहीं हुई थी, वह अच्छे से नींद लेती थीं।
हालांकि शादी के बाद उनकी नींद में बाधा पड़ने लगी। इसकी एक प्रमुख वजह यही है कि उन्हें किसी अन्य के साथ सोने की आदत नहीं रही। इस लिहाज से नवविवाहितों को पहले से विवाहित महिला की तुलना में नींद में खलल का सामना करना पड़ता है।
इन निष्कर्षो तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने सोने की प्रवृत्ति, सोने और जागने की शैली और रिश्तों पर प्रभाव का बारीकी से अध्ययन किया।
एक अन्य अध्ययन में संबंधों की प्रगाढ़ता और भरपूर नींद के बीच के संबंध को उजागर किया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि अच्छी नींद लेने वाले पुरुष अपने संबंधों को लेकर कहीं अधिक सकारात्मक रहते हैं।
वहीं, महिलाओं के क्रम में दांपत्य संबंधों का सीधा प्रभाव अव्यवस्थित नींद से जुड़ा है। टुकड़ों-टुकड़ों में नींद लेने वाली महिलाएं और उनके साथी के संबंध सामान्य नहीं पाए गए। यह भी पाया गया कि अगर दिन में एक बार वाद-विवाद होता है, तो उसका असर उस रात को उनकी नींद पर पड़ता है। नतीजतन अगले दिन विवादों की संख्या सीधे तौर पर बढ़ जाती है। इन दो अध्ययनों के आधार पर कहा जा सकता है कि नींद और खुशहाल दांपत्य का आपस में गहरा रिश्ता है। अत: संबंधों में समस्याएं झेल रहे लोग अगर अपनी नींद की तरफ ध्यान देते हैं, तो उसमें अपेक्षित सुधार लाया जा सकता है।