वाशिंगटन. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एटलस वी रॉकेट की सहायता से दो अंतरिक्ष यानों को चंद्रमा की खोजबीन के लिए रवाना किया है। इसमें से पहला यान चंद्रमा के सतह का सर्वेक्षण करेगा, वहीं दूसरा चंद्रमा के दक्षिणी पोल पर पानी खोजेगा।
नासा के इस मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट वैज्ञानिक जॉन केलर ने कहा कि पहला यान चंद्रमा की नजदीकि कक्षा में प्रवेश कर मैपिंग का काम करेगा। इसके मदद से चंद्रमा की सहत का थ्रीडी मैप बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही इससे उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें भी ली जाएगी। इस मिशन से प्राप्त सूचनाएं भविष्य के अंतरिक्ष अभियान के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगी। दूसरा अंतरिक्ष यान चंद्रमा के पिछले हिस्से की खोजबीन कर चंद्रमा के दक्षिणि पोल के क्रेटरों में संभावित पानी का पता लगाएगा। यह खोज काफी महत्वपूर्ण होगा, क्योकि यदि चंद्रमा पर पानी मिल जाता है तो इससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यहां ठहरना आसान हो जाएगा।
क्या महत्व है इस मिशन का
इस दशक में चंद्रमा के लिए यह नासा का यह पहला मिशन है। नासा ने अपने इस महत्वाकांक्षी मिशन में 583 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। इससे प्राप्त सूचाओं का 2020 में चंद्रमा पर भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के अभियान में काफी मदद मिलेगी। अगर इस मिशन में चंद्रमा के दक्षिणी पोल पर पानी मिल जाता है तो यह एक महान उपलब्धी होगी। इसके बाद चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों का लंबे समय तक रूक पाना आसान हो जाएगा।
अन्य देशों से मिलने लगी है चुनौतियां
अमेरिका अंतरिक्ष के क्षेत्र में खुद को सबसे आगे मानाता रहा है परंतु अब उसे चुनौतियां मिलने लगी हैं। चांद पर अमेरिका सबसे पहले जरूर पहुंचा परंतु अब चीन भी अपने अंतरिक्ष यात्री भेज चुका है, वहीं भारत ने भी चंद्रयान-1 उपग्रह खोजबीन के लिए भेजा हुआ है। अमेरिका के कुछ विशेषज्ञ तो यहां तक कहने लगे हैं कि अगर तेजी से इस क्षेत्र में काम नहीं किया जाता है तो दूसरे देश इसमें आगे हो सकते हैं।