सनातन काल से मनुष्य बुढ़ापे को रोकने के लिए प्रयत्नशील है। हालांकि वृद्धावस्था एक प्राकृतिक घटना है, जिसे रोका नहीं जा सकतां, लेकिन बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा जरूर किया जा सकता है और यह संभव है आयुर्वेदिक रसायन चिकित्सा पद्धति द्वारा।
रसायन क्या है?
जिसका सेवन करने से वृद्धावस्था और बीमारियों का नाश होता हो वह रसायन है। इसके सेवन से शरीर के लिए आवश्यक धातुओं को प्राप्त किया जा सकता है। रसायन प्रयोग से सुंदर, स्वस्थ, लंबा जीवन, बल और यौवन की पुन:प्राप्ति होती है। वृद्धावस्था निवारण की औषधीय वनस्पतियों में आंवला, हल्दी, शतावरी, अश्वगंधा, जीवंती, ब्राrाी, शंखपुष्पी, गूगल, त्रिफला आदि मुख्य हैं।
रसायन प्रयोग
दीघायरु प्रदान करने वाला रोगनाशक रसायन शुद्ध शरीर और शुद्ध मन वाले व्यक्तियों पर ही असर करता है। रसायनों का प्रयोग करके मनुष्य चिरायु, स्वस्थ, सौंदर्य, यौवन, शारीरिक शक्ति, स्मृति तथा बुद्धि प्राप्त कर सकता है।
रसायन में मुख्य रूप से जो फल उपयोग में लाया जाता है वह है आंवला, जिसमें विटामिन सी होता है। यह बीमारियों का प्रतिकार तो करता ही है, साथ ही यह उन कोशिकाओं के क्षरण को भी रोकता है जिनसे झुर्रियां आती हैं।
गिलोय-गोखर (वनस्पति और बीज) और आंवला- इन तीनों व अन्य आयुर्वेदिक को मिलाकर जो चूर्ण बनाया जाता है उसे रसायन चूर्ण कहते हैं। इस चूर्ण का पानी के साथ सेवन (प्रतिदिन सुबह-शाम एक-एक चम्मच) करने से बहुत फायदा होता है।
अश्वगंधा, शतावरी, सफेद मूसली, शिलाजीत आदि विविध वनस्पतियों का वैदकीय सलाह अनुसार सेवन करने से भी बहुत लाभ मिलता है।
गाय के दूध और घी रसायन में श्रेष्ठ माना गया है। शरीर को स्वस्थ तथा युवा रखने के लिए घी तथा दूध का सेवन श्रेष्ठ है।
युवा बने रहने के नुस्खे
समय पर भोजन करना
भोजन में हरी सब्जियों व फलों का भरपूर मात्रा
तेलीय, तीखे व चटपटे पदार्थो का कम सेवन
तनावरहित जीवन
नित्य व्यायाम
समतोलित भोजन और पर्याप्त नींद
भोजन करने व सोने-जागने का निर्धारित समय