आजादी का महत्व बताती ‘बेधुंद’
Bhaskar Correspondent Thursday, June 25, 2009 04:08 [IST]  

bedhundइंदौर. आज के युवा देश की आजादी का महत्व नहीं समझते। उन्हें लगता है देश के आजाद होने का अर्थ है उनका स्वतंत्र हो जाना। यानी वे जो चाहे, कर सकते हैं। वे यह सोचते हैं कि इतिहास की बातें केवल स्कूल की पढ़ाई तक ही सीमित रखना चाहिए। युवाओं की ऐसी सोच पर आधारित है मराठी फिल्म ‘बेधुंद’। इसका प्रदर्शन मराठी समाज इंदूर द्वारा 28 जून को मधुमिलन टॉकीज में सुबह 9.15 बजे किया जाएगा।

फिल्म की कहानी तो रोचक है ही इसे रोचक अंदाज में प्रस्तुत भी किया गया है। मेजर ए.एस. मराठे मिल्रिटी फोर्स से रिटायर्ड हैं। उन्होंने अपनी लाइफ में कई अवॉर्ड प्राप्त किए और वे चाहते हैं कि आज के युवा देश की आजादी को समझें। वे जानें की आजादी उन्हें लाखों लोगों की कुर्बानी से मिली है। युवाओं को इसी बात को समझाने के उद्देश्य से वे ट्रेनर के रूप में मिल्रिटी स्कूल जॉइन करते हैं। इसमें आठ युवा हैं जिन पर यह कहानी आधारित है, पैडी, समीर, निखिल, अमेय, जिगनेश व लड़कियां अनुष्का, मिताली और मन्वा। वे उन युवाओं में देश प्रेम की भावना किस तरह जगाते हैं, देखने लायक है।

फिल्म के लेखक हैं सचिन दारेकर। डायरेक्टर है द्यानेश भालेकर। कलाकार संदीप कुलकर्णी, मुग्धा गोडबोले, संतोष जुवेकर, सुशांत शेलर, निरंजन नामजोशी, अजिंक्य जोशी, महेश सुभेदार, मृनमयी लागू, प्राजक्ता दातार, स्नेहलता तवड़े है।

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