स्वतंत्र भारत में पहला आम बजट आर.के. शनमुकम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था।
प्रणब मुखर्जी पहले राज्यसभा सदस्य है जो वित्तमंत्री बनें, उन्होंने 1982-83, 1983-84 और 1984-85 का बजट पेश किया।
राजीव गांधी ने 1987088 का बजट उस वक्त पेश किया जब वीपी सिंह उनकी सरकार छोड़ कर चले गए। अपने दादा और मां के बाद प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए बजट पेश करनेवाले वह तीसरे व्यक्ति बनें। एनडी तिवारी ने 1988-89, एसबी चह्वान ने 1989-90 और मधु दंडवते ने 1990-91 का आम बजट पेश किया।
यशवंत सिन्हा को वित्तमंत्री बनने का मौका तो मिला लेकिन वह केवल अंतरिम बजट ही पेश कर सके।
मनमोहन सिंह ने 1991 मई में चुनावों के बाद वित्तमंत्री के तौर पर बजट पेश किया। अगले वार्षिक बजट के लिए 1992-93 में सिंह ने खुली अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया और निर्यात डच्यूटी 300 प्रतिशत से छटा कर 50 प्रतिशत कर दी।
1996 में चुनावों के बाद गैर कांग्रेसी ने वित्तमंत्री का पद संभाला। पी चिदंबरम ने तमिल मनीला कांग्रेस के सदस्य के तौर पर 1996-97 वर्ष का बजट पेश किया।
संवैधानिक परेशानियों के चलते आए. के. गुजराल के कार्यकाल में चिदंबरम के बजट को पास करने के लिए वर्ष 1997-98 में एक खास संसद सत्र बुलाया गया। यह बजट बिना बहस के पास हो गया।