एक शोध से पता चला है कि कार्यगत तनाव का सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। वह न सिर्फ कम वजन का पैदा हो सकता है, बल्कि उसका जन्म समय से पहले होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में काम के अधिक दबाव से पीड़ित महिलाओं के अंडरवेट बच्चे होने की संभावना बढ़ जाती है। हाल ही में हुए एक शोध से इस बात का खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में कार्यगत तनाव की शिकार महिलाओं के जन्म लेने वाले बच्चे वजन में कम होते हैं।
सामान्य महिलाओं की तुलना में उनके बच्चों का वजन ढाई आउंस तक कम हो सकता है। यही नहीं, समय से पहले जन्म देने की दर भी पचास फीसदी तक बढ़ सकती है। ऐसा उन महिलाओं के साथ अधिक होता है, जो सप्ताह में 32 घंटे से अधिक काम करती हैं। इन महिलाओं के बच्चों को वजन पांच आउंस तक कम हो सकता है, बनिस्पत सामान्य और कार्यगत दवाब की कम शिकार वाली महिलाओं के।
कार्यगत दबाव की श्रेणी में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के काम आते हैं। इस शोध में यह भी पाया गया है कि कम आय वाले कामों में यह दबाव अधिक देखने में आता है। शोध में पाया गया कि दबाव और तनाव से कॉर्टीसोल और नोरेपाइनफ्रीन हार्मोन की सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास प्रभावित होता है।
इस संदर्भ में अच्छी बात यह सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान काम करने से बच्चे के वजन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। फर्क पड़ने की संभावना कार्यगत दबाव और तनाव पर ही निर्भर करती है।