नई दिल्ली/श्रीनगर
कश्मीरी मूल की फराह पंडित को बराक ओबामा प्रशासन में मुस्लिम दुनिया से जुड़े मामलों पर अमेरिका का विशेष प्रतिनिधि बनाया गया है। विदेश मंत्रालय में उनकी नियुक्ति का कश्मीर में जहां स्वागत हुआ है, वहीं नई दिल्ली में कई लोगों के माथे पर परेशानी की लकीरें उभर आई हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने गुरुवार को फराह की नियुक्ति की घोषणा की। उनका काम दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय से जुड़े मामलों पर क्लिंटन को सलाह देना है।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पंडित का परिवार मूल रूप से उत्तरी कश्मीर में स्थित सोपोर का रहने वाला है। यह शहर अलगाववादियों के लिए जाना जाता है और हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी का गृह नगर होने के अलावा आतंकियों ने यहां से कई युवाओं की भर्ती भी की हैं।
सोपोर में लोग अब उम्मीद कर रहे हैं फराह कश्मीर मुद्दे को अमेरिकी प्रशासन में उठाएंगी। दूसरी ओर नई दिल्ली ने फराह की नियुक्ति को अमेरिका का अंदरूनी मामला बताकर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि वे फराह के कश्मीरी मूल का होने के कारण कश्मीर मुद्दे के प्रति उनके संभावित झुकाव से चिंतित नहीं है। एक अधिकारी ने कहा, ‘हम ओबामा प्रशासन से यह उम्मीद नहीं करते कि वह केवल फराह की सलाह पर कोई फैसला लेगा।
फराह पांच साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ अमेरिका चली गई थीं। वे पूर्ववर्ती बुश प्रशासन में भी यूरोपीय और एशिया से जुड़े मुस्लिम मामलों पर वरिष्ठ सलाहकार रह चुकी हैं। ‘फराह ने कश्मीर को गौरान्वित किया है और मैं अपने भाई को फोन कर इसकी बधाई दूंगा।’
- अब्दुल रशीद पंडित, फराह के चाचा