1 नवंबर 1996 में मुंबई के अंधेरी स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में माइकल जैक्सन का एक कॉन्सर्ट हुआ था। यह उनके वर्ल्ड हिस्टरी टूअर का हिस्सा था। धड़कने रोक देने वाले इस दो घंटे के शो को आज भी उनके चाहने वाले याद करते हैं। उन्हें शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने आमंत्रित किया था।
शिव उद्योग सेना के बैनर तले हुए इस आयोजन के लिए जैक्सन अक्टूबर 96 को मुंबई आए थे। परंपरागत मराठी पोशाक पहने फिल्म अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने तिलक और आरती से उनका स्वागत किया था। लाखो लोग उनकी एक झलक पाने के लिए एयरपोर्ट पर एकत्रित हुए थे।
उनका बीस कारों का काफिला सड़क किनारे खड़े बच्चों से मिलने के लिए रुका भी था। वे ओबेराय होटल (अब होटल त्रिडेंट) में रुके थे। यहां का स्टाफ पाप की दुनिया के बादशाह की मिलनसारिता का कायल हो गया था। किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि वे उतने सहज होंगे।
होटल का स्टाफ उन्हें याद करते हुए कहता है कि उन्होंने सभी हाथ मिलाए और बात की। इस दौरान जब उन्हें बताया गया कि होटल में बच्चों की एक पार्टी हो रही है तो उन्होंने उस पार्टी को अपने कमरे में आयोजित किया और सभी को बर्गर और केक खिलाए थे। 1980 के समय से ही भारत के युवाओं पर माइकल जैक्सन का प्रभाव दिखने लगा था।
जब माइकल जैक्सन अपने निजी विमान से मुंबई एयरपोर्ट पर उतरे तो लाखों लोग उनकी एक झलक देखने के लिए बेताब थे । ऐसे समय में उनकी इस यात्रा की रिपोर्टिग करना बहुत चुनौती पूर्ण था। जैक्सन के स्वागत में लेजिम नृत्य किया जा रहा था उनकी एक झलक देखना भी मुश्किल था। अचानक मेरे परिचित एयर इंडिया के एक अधिकारी ने मुझे आवाज दी। उन्होंने बताया कि जैकसन लेजिम नर्तकों के घेरे में खडे हैं।
मैं घेरे में घुसी तो मैने उन्हें सामने ही खड़ा पाया। बर्फ की तरह सफेद चेहरा, गुलाबी होंठ और चिरपरिचित काला हैट। यह मेरे पत्रकारिता जीवन का सबसे विशेष क्षण था। इस फूटेज ने करीबी रिश्तेदारों और पत्रकारों के बीच मेरा स्टेंडर्ड ऊंचा कर दिया था। जब तक जैक्सन मुंबई में रहे पूरा शहर उनके और उनकी कहानियों के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा।
बाला साहब को किया प्रभावित
वे बाल ठाकरे से मिलने उनके निवास मातोश्री भी गए थे । ठाकरे ने उन्हें चांदी का तबला और तानपुरा भेंट किया था। 83 साल के ठाकरे उन्हें याद करते हुए कहा कि दुनिया में कितने लोग उनकी तरह नाच सकते हैं। जैकसन कुछ ऐसे अमेरिकन संस्कारों का प्रतिनिधित्व करते थे जिसे मानने में भारत में पछतावा नहीं होना चाहिए। भारत यात्रा के दौरान उन्हें भारतीय खाना भी बहुत अच्छा लगा था। बाला साहेब ठाकरे को इसके बाद कई सवालों का जवाब देना पड़ा था क्योंकि शिवसेना को भारतीय परपंराओं और संस्कृति का बड़ा पैरोकार माना जाता था।
डीएनए पत्रकार नीता कोल्हटकर के संस्मरण