Career
अपनाएं समाज सेवा की डगर
भास्कर नेटवर्क. Monday, June 29, 2009 09:39 [IST]  

कुछ क्षेत्रों को छोड़ दें तो अधिकांश पेशों में लोग काम और वक्त के चलते घर और ऑफिस के बीच सामंजस्य नहीं बैठा पाते। घर और काम को लेकर आत्मसंतुष्टि का भाव काफी हद तक पीछे चला जाता है।

social work ऐसे में समाजसेवा के साथ कॅरियर जोड़ना आपके लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है। सुनने में अजीब सा लग सकता है, लेकिन आज दूसरे क्षेत्रों की तरह इस क्षेत्र में भी पेशेवर लोगों की मांग बढ़ रही है। हमारे देश के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय इससे जुड़े कोर्स करवाते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता समाज के लोगों की समस्याओं को खत्म करने में मदद करते हैं और उन्हें उनके अधिकार दिलाकर जीवन को खुशगवार बनाते हैं। समाज सेवा में लोगों की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक परेशानियों का पता लगाकर उन्हें दूर करना मुख्य काम है। समाज में व्याप्त बुराइयों को जागरूकता कार्यक्रमों से दूर करना और लोगों की मदद के लिए बनाई गई योजनाओं की जानकारी का प्रसार भी इनके काम का मुख्य हिस्सा है।

विस्तृत दायरा समाज सेवा का क्षेत्र बहुत विस्तृत है। हर समाज और तबके की अपनी अलग समस्या होती है। इन समस्याओं और स्थिति के अनुसार ही सामाजिक कार्यकर्ताओं के काम का स्वरूप बदलता जाता है। फिर भी इनके कुछ एक काम तय से हैं,

- इस क्षेत्र में काम कर रहे समाजसेवी लोगों की मानसिक और मनोवैज्ञानिक दिक्कतों को कम करने के लिए काम करते हैं। वे पीड़ितों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराते हैं। इनका काम लोगों का मनोवैज्ञानिक उपचार कर उन्हें राहत पहुंचाने का होता है। आज कई कंपनियां अपने यहां इस तरह को लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।

- स्कूल छोड़कर जाने वाले बच्चों और उनके परिवार की समस्याएं जानना और उन्हें ऐसा न करने के लिए प्रेरित करना मुख्य काम है। शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर बहस, सेमिनार आयोजित करना, बच्चों की प्रतिभा के विकास के लिए काउंसिलिंग वगैरह भी शामिल है।

- अपराधी प्रवृत्ति के लोगों या जेल में बंद लोगों को सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं। वे उन्हें उनकी सामाजिक जिम्मेदारियों का अहसास कराते हैं और उनकी परेशानियों का हल ढूंढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

- मरीज और उनके परिजनों को मुश्किल की इस घड़ी में भावनात्मक संबल देते हैं। वे गरीबों के इलाज के लिए पैसा जुटाते हैं। इलाज में जुटे डॉक्टरों को मरीज की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्थिति के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाकर उनके इलाज में मदद करते हैं।

अस्पताल से घर पहुंचने के बाद वह मरीज के घर जाकर भी काउंसिलिंग करते हैं। कुष्ठ रोगियों, एचआईवी/एड्स से खतरों के प्रति लोगों को आगाह करने के साथ ही पोलियो, टीबी रोकने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

- सामाजिक कुरीतियों जैसे दहेज, जाति प्रथा, अशिक्षा, नशे की लत जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए समाजसेवी सेमिनार से लेकर नुक्कड़ नाटक आदि का आयोजन करते हैं। पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से वह पौधरोपण कार्यक्रम चलाते हैं। नेत्रदान, रक्तदान शिविरों के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने का काम इन्हीं के जिम्मे है।

उपलब्ध पाठ्यक्रम

स्नातक करने के बाद सोशल वर्क में दो साल का स्नातकोत्तर कोर्स देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में उपलब्ध है। समाज कार्य में कॅरियर बनाने के लिए यह अनिवार्य है। वैसे अब तो समाजशास्त्री व मनोवैज्ञानिकों की भी इस क्षेत्र में काफी जरूरत है। स्नातकोत्तर कोर्स को एमएसडब्ल्यू (मास्टर्स इन सोशल वर्क) कहते हैं, जिसमें परीक्षा के माध्यम से प्रवेश मिलता है।

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