मुंबई। जब छह जुलाई को बजट पेश होगा तो पहले पब्लिक आफर (आईपीओ) में निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है। बताया जाता है कि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है कि आईपीओ बाजार में निवेश पर कुछ टैक्स रियायतें दी जाएं।
देश का प्राइमरी मार्केट 18 माह पहले रिलायंस पावर आईपीओ के बाद से खामोश हो गया है। निवेश बैंकिंग के सूत्रों का कहना है कि ऐसा एक प्रस्ताव सेबी के साथ चर्चा में है और यह वित्तमंत्री के बजट भाषण का हिस्सा बन सकता है।
क्या है प्रस्ताव
आईपीओ में रिटेल निवेश पर डिडक्शन का लाभ आयकर अधिनियम की 80 सी के तहत दिया जा सकता है। अब तक 80सी के तहत इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) और यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप्स) को ही आयकर में छूट हासिल है।
लेकिन इन सभी निवेश पर तीन साल की लाक इन अवधि लागू है। शेयरों में जितना जोखिम होता है, उसे देखते हुए अब तक शेयरों में निवेश पर टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलता। सरकार अब ऐसी छूटें सरकार द्वारा नियंत्रित कंपनियों के आईपीओ में निवेश तक बढ़ा सकती है। इस तरह के निवेश पर एक साल के लाक इन का प्रस्ताव दिया जा सकता है।
निवेश को बढ़ावा
अगर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो शेयरों में रिटेल निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। खासतौर से आईपीओ बाजार को तेजी मिल सकती है। प्रमुख निवेश बैंकर के अनुसार ऐसी टैक्स छूट उद्योगों को धीमेपन से बाहर आने में मदद कर सकती है। बुनियादी ढांचे की कंपनियों को टैक्स छूट से धन हासिल करने में मदद मिलेगी। इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर आईपीओ और इंफ्रास्ट्रक्चर बांड की बिक्री में टैक्स छूट देनी चाहिए। पिछले 18 महीने में कुछ कंपनियां ही बाजार से धन हासिल कर पाई हैं। सेबी ने राइट इश्यू के नियमों को सरल बनाया और क्यूआईपी प्लेसमेंट भी आसान किया, फिर भी बाजार में धीमापन दिखाई दिया है।
कतार में आईपीओ
विदेशी धन के प्रवाह ने सेकंडरी मार्केट में सुधार किया है। महिंद्रा ग्रुप को महिंद्रा हालिडेज के आईपीओ को पूरा भरवाने में सफलता मिल गई है। अदानी पावर और पेंटालून के अपने आईपीओ दोबारा लाने की खबरें हैं। कई सरकारी कंपनियां भी आईपीओ लाने की तैयारी कर रही हैं।
अगर टैक्स छूटें मिलती हैं तो इन कोशिशों को अच्छी सफलता मिल सकती है।