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दोहरा खेल और नहीं
हामिद मीर Wednesday, July 01, 2009 11:01 [IST]  

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी इन दिनों दुनिया के अलग-अलग देशों में जाकर आतंकवाद के खिलाफ समर्थन जुटाने में लगे हैं।

Hamid Meer कुछ दिन पूर्व ब्रुसेल्स में नाटो के मुख्यालय का उनका दौरा और यूरोपीय संघ के अध्यक्ष चेक रिपब्लिक के वास्लाव क्लॉस के साथ मीटिंग इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राजी करने का बड़ा प्रयास था।

इसमें कोई संदेह नहीं कि वाशिंगटन से लेकर लंदन और मास्को से लेकर ब्रुसेल्स तक दुनिया के कई नेताओं ने पाकिस्तान और राष्ट्रपति जरदारी के बारे में बहुत अच्छी बातें कहीं, लेकिन इनमें से ज्यादातर अब भी आशंकित हैं।

जरदारी न सिर्फ अवाम के बीच बल्कि सदन के भीतर भी तेजी से अपना राजनीतिक समर्थन खोते जा रहे हैं। उनकी एक सहयोगी पार्टी जेयूआई-एफ से जुड़े दो मंत्री दक्षिणी वजीरिस्तान के स्वात में सैन्य कार्रवाई की खुलेआम विरोध कर रहे हैं। पाकिस्तान के ज्यादातर लोगों ने स्वात घाटी में पाकिस्तानी सशस्त्र सेनाओं की हालिया आक्रामक कार्रवाई का समर्थन किया है।

इसको पांच हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं और इसके पूरा होने से पहले ही जरदारी ने दक्षिणी वजीरिस्तान में तालिबान नेता बैतुल्ला मेहसूद के खिलाफ एक और ऑपरेशन चलाने का आदेश दे दिया। ज्यादातर लोग इसका भी समर्थन करेंगे, लेकिन सरकार के पास अफगानिस्तान से सटे कबीलाई इलाकों में तालिबान को हराने की कोई पुख्ता योजना नहीं है। सरकार ने दक्षिणी वजीरिस्तान और स्वात में सैन्य अभियान छेड़ने से पहले सदन को विश्वास में नहीं लिया।

Swat नेशनल एसेंबली में मुख्य विपक्षी पार्टी नवाज शरीफ की पीएमएल-एन ने स्वात में सैन्य अभियान का तो समर्थन किया, लेकिन दक्षिणी वजीरिस्तान संबंधी रणनीतियों पर उसे कुछ गंभीर आपत्तियां हैं। नवाज दक्षिणी वजीरिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले से खुश नहीं हैं और उन्हें सरकार समर्थक अतिवादी नेता कारी जैनुद्दीन मेहसूद की भूमिका पर भी आपत्ति है।

मीडिया में कारी जैनुद्दीन मेहसूद के अचानक उभरने और उसके बड़े-बड़े दावों से न सिर्फ राजनीतिक जगत बल्कि इस्लामाबाद के राजनयिक हलकों में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। पिछले दिनों पाकिस्तानी मीडिया में दिए गए अपने कुछ साक्षात्कारों में कारी जैनुद्दीन मेहसूद ने आरोप लगाया कि बैतुल्ला अमेरिकी व भारतीय एजेंट है और उसी ने बेनजीर भुट्टो को मारा। उसने यह भी कहा कि असली जिहाद तो पाकिस्तान के बजाय अफगानिस्तान में जारी है।

इससे पश्चिमी जगत के राजनयिक भ्रमित हो गए हैं। अब वे सवाल पूछ रहे हैं कि यदि बैतुल्ला मेहसूद बेनजीर भुट्टो की हत्या में शामिल था तो क्या इसका मतलब यह है कि अमेरिकी सत्ता भी इस साजिश में लिप्त थी? एक और सवाल एक पूर्वी यूरोपीय राजनयिक ने विदेशी कार्यालय के किसी अधिकारी से पूछा कि एक तरफ जरदारी ब्रुसेल्स में नाटो मुख्यालय का दौरा कर रहे थे और उसी दिन पाकिस्तानी सत्ता तंत्र ने कारी जैनुद्दीन को मीडिया में बोलने की इजाजत दे दी। इसमें कारी खुलेआम कहता है कि जिहाद तो अफगानिस्तान में नाटो सेनाओं के खिलाफ चल रहा है। क्या यह नाटो या कारी जैनुद्दीन के साथ दोहरा खेल है?

कारी ने एक साक्षात्कार में कहा कि अब्दुल्ला मेहसूद की मौत के बाद उसके बैतुल्ला मेहसूद के साथ मतभेद हो गए। कारी के एक करीबी सूत्र के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार अब्दुल्ला मेहसूद को मारना चाहती थी, क्योंकि वह 2005 में दो चीनी इंजीनियरों के अपहरण में लिप्त था। अब्दुल्ला मेहसूद के खिलाफ पाकिस्तान ने २क्क्५ में बैतुल्ला मेहसूद की सेवाएं लीं। बैतुल्ला ने फरवरी 2005 में सरकार के साथ पहला शांति समझौता किया जो जुलाई 2005 में खत्म भी हो गया। वर्ष २क्क्७ में अब्दुल्ला मेहसूद के मारे जाने के तुरंत बाद उसने एक और समझौता किया।

इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने 3 नवंबर 2007 को 200 सैनिकों के बदले में 36 अतिवादियों को रिहा किया। अब्दुल्ला के मारे जाने के बाद उसके एक करीबी सहयोगी मसूदुर रहमान मेहसूद नामक एक शख्स का आरोप था कि बैतुल्ला ने वास्तव में अब्दुल्ला के ठिकाने के बारे में सेना को जानकारी मुहैया कराई, लेकिन बाद में वह इससे मुकर गया। अब्दुल्ला की मौत के बाद बैतुल्ला ने खुद को नेता घोषित कर दिया। बैतुल्ला ने दक्षिणी वजीरिस्तान में मसूदुर रहमान को एक रिमोट कंट्रोल बम के जरिए मार दिया।

कारी जैनुद्दीन दरअसल मसूदुर रहमान का बड़ा बेटा है और उसने अपने पिता की मौत का बदला लेने की ठान ली। वह तालिबान में ‘अब्दुल्ला मेहसूद समूह’ का नेतृत्व कर रहा है और जुलाई 2008 में मीडिया में एक पत्र जारी कर उसने बैतुल्ला से बदला लेने की घोषणा की। वह एक पूर्व खासदार (कबीलाई पुलिस का सदस्य) है और दक्षिणी वजीरिस्तान के शकाई व जंडोला इलाकों में सक्रिय है। एक तालिबानी नेता मौलवी नाजिर गुप्त तौर पर जैनुद्दीन का समर्थन कर रहा है और कुछ दिन पूर्व उसके इलाके में ड्रोन के हमले हुए हैं। आज तक एक भी अमेरिकी ड्रोन ने बैतुल्ला के ठिकाने को निशाना नहीं बनाया और यही कारण है कि कई लोग उसे अमेरिकी एजेंट बताते हैं।

अब कारी जैनुद्दीन बैतुल्ला के खिलाफ पाकिस्तानी सेनाओं का एक सहयोगी बन गया है। जैनुद्दीन ने बैतुल्ला के इलाके के कई ताकतवर लोगों से संपर्क किया लेकिन इनमें से ज्यादातर उसके साथ सहयोग करने को राजी नहीं हैं। उन्हें लगता है कि पाकिस्तानी व्यवस्था ने पहले अब्दुल्ला के खिलाफ बैतुल्ला का इस्तेमाल किया और अब बैतुल्ला के खिलाफ जैनुद्दीन का इस्तेमाल कर रही है और आखिरकार दोनों मारे जाएंगे।

बैतुल्ला के इलाके के कई लोगों से दक्षिणी वजीरिस्तान के राजनीतिक प्रशासन ने कारी जैनुद्दीन की मदद पाने की खातिर संपर्क किया। एक कबीलाई व्यक्ति ने तो प्रशासन से जुड़े अधिकारी से कह भी दिया, ‘हमें मूर्ख मत बनाइए। राष्ट्रपति जरदारी नाटो को सहयोग का भरोसा दिला रहे हैं और आप हमसे ऐसे शख्स का सहयोग करने के लिए कह रहे हैं जो खुलेआम कह रहा है कि अफगानिस्तान जाकर नाटो सेनाओं के खिलाफ लड़ो।’

जेयूआई-एफ के मौलाना फजलुर्रहमान जैसे जरदारी के कुछ सहयोगी एक बार फिर तालिबान से सीधी वार्ता का सुझाव दे रहे हैं लेकिन जरदारी इसे अनसुना कर रहे हैं। जरदारी मौलाना फजलुर्रहमान को नजरअंदाज कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सदन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हो सकता है बैतुल्ला डबल एजेंट हो और हमें उससे पीछा छुड़ाना है, लेकिन जरदारी को किसी और डबल एजेंट की मदद के बजाय सदन की मदद से उसका मुकाबला करना चाहिए।

उन्हें तालिबान के खिलाफ मुहिम के लिए सदन के समर्थन और मंजूरी की दरकार है। पाकिस्तान एक पारदर्शी और साहसिक सैन्य रणनीति के सहारे, जिसे व्यापक राजनीतिक समर्थन हो, आतंकवाद को हरा सकता है। दोहरा खेल अब और नहीं चल सकता।

- लेखक पाकिस्तान में जिओ टीवी के कार्यकारी संपादक हैं।

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